IMF ने भारत को दिया C ग्रेड: जीडीपी की आंकड़े मजबूत फिर भी सवाल उठ रहे हैं?
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IMF ने भारत को दिया C ग्रेड: जीडीपी की आंकड़े मजबूत फिर भी सवाल उठ रहे हैं?

IMF ने भारत को दिया C ग्रेड: जीडीपी मजबूत फिर भी सवाल उठ रहे हैं?

IMF ने भारत को दिया C ग्रेड: जीडीपी की आंकड़े मजबूत फिर भी सवाल उठ रहे हैं?
Image Credit: (ANI)

भारत ने अपना अनुमानित सकल घरेलू उत्पाद 7.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर बताया है।

भारत सरकार में हाल ही में दावा किया कि वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही मैं देश की वास्तविक जीडीपी 8.2% बड़ी है। पिछले साल इसी अवधि में यह वृद्धि केवल 5.6% थी। 

सरकार के अनुसार ये आंकड़े दिखाते हैं कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत कर रहा है।

इसके साथ ही भारत में अपनी अनुमानित जीडीपी आकर को 7.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर बताया है। लेकिन इसी बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की ताजा रिपोर्ट सामने आई है, जिसने भारत के पीडीपी और अन्य राष्ट्रीय आर्थिक आंकड़ों की गुणवत्ता को C ग्रेड दिया है।

यही वजह है कि अब यह चर्चा तेज हो गई है कि जब भारत के आर्थिक आंकड़े इतनी मजबूत दिख रहे हैं, तो फिर IMF ने कम रेटिंग क्यों दी?

IMF की C रेटिंग पर विवाद क्यों?

IMF हर साल सदस्य देशों के आर्थिक आंकड़ों की गुणवत्ता का आकलन करता है — जैसे कि उत्तर कितनी पारदर्शिता से जुटाया गया, कितना विश्वसनीय है, और अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक कितना सटीक है।

IMF की मौजूदा रिपोर्ट में भारत को C ग्रेड दिया गया, जिसका मतलब है कि डेटा की गुणवत्ता को लेकर कुछ सुधार की जरूरत है।

लेकिन सरकार और विपक्ष इस मुद्दे पर आमने-सामने है।

सरकार का पक्ष: यह कोई नई बात नहीं

बीजेपी ने साफ कहा है कि IMF कि यह रेटिंग भारत के जीडीपी ग्रोथ को संदिग्ध नहीं बनाती।

अमित मालवीय ने कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम पर निशाना साधते हुए कहा कि:

• “पूर्व वित्त मंत्री बेवजह डर फैला रहे हैं, क्योंकि कांग्रेस यह स्वीकार नहीं कर पा रही है कि भारत अब वह कमजोर Fragile Five अर्थव्यवस्था नहीं है, जैसे वह लोग छोड़कर गए थे।”

बीजेपी का कहना है कि:

* MF की C रेटिंग नई नहीं है।

* रेटिंग की मुख्य वजह 2011-12 का आधार वर्ष है, जो अब पुराना पड़ रहा है।

* तकनीकी कारणों से कई वर्षों से यह ग्रेड बदल नहीं पाया है।

यानी सरकार के अनुसार यह तकनीकी मुद्दा है, अर्थव्यवस्था अर्थव्यवस्था की कमजोरी नहीं।

विपक्ष का आरोप: डेटा पारदर्शी नहीं

कांग्रेस के नेता पी. चिदंबरम ने एक्स (Twitter) पर सवाल उठाया की:

“जब सरकार तेज जीडीपी ग्रोथ दिख रही है, तो IMF ने भारत को सी ग्रेड क्यों दिया? इसका जवाब सरकार को देना चाहिए।”

कांग्रेस के जयराम रमेश ने कहा कि:

• ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन में कोई खास बढ़ोतरी नहीं दिख रही, यानी अर्थव्यवस्था में नई पूंजी निवेश की रफ्तार बेहद धीमी है।

• निजी निवेश ( Private Investment) बढ़ नहीं रहा, ऐसे में ऊंची जीडीपी ग्रोथ कितनी टिकाऊ है, यह सवाल बना हुआ है।

कांग्रेस का आरोप है कि सरकार जीडीपी की चमक दिखा रही है, लेकिन असल में अर्थव्यवस्था में मजबूत निवेश का आधार कमजोर है।

तो असल मुद्दा क्या है?

यह विवाद दो बातों पर केंद्रित है:

1. भारत की आर्थिक गति तेज है — इसमें कोई शक नहीं।

8.2% जीडीपी ग्रोथ और 7.3 ट्रिलियन डॉलर की अनुमानित अर्थव्यवस्था यह दिखती है कि भारत वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ रहा है।

 

2. IMF की चिंता डेटा की गुणवत्ता को लेकर है, ग्रोथ रेट को लेकर नहीं।

रेटिंग का संबंध है यह है कि:

• आंकड़े किन तरीकों से जुटाए गए

• किन मानकों का पालन किया गया

• और क्या डेटा आधुनिक जरूरत के हिसाब से अपडेट है या नहीं।

इसका मतलब यह नहीं कि भारत की ग्रोथ गलत है, बल्कि यह की आंकड़ों को और अधिक पारदर्शी और टेक्निकल रूप से अपडेटेड बनाने की जरूरत है।

निष्कर्ष: बहस जारी है, सुधार की जरूरत भी

IMF की C रेटिंग के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है कि भारत को अपने डेटा कलेक्शन सिस्टम, आधार वर्ष अपडेट, और स्टैटिस्टिकल मेथड्स को और मजबूती से सुधारना चाहिए।

वहीं सरकार का दावा है कि भारत की आर्थिक वृद्धि सुदृढ़ है और यह रेटिंग महज तकनीकी कारणों से है।

यह बहस आगे भी चलती रहेगी लेकिन इतना तय है कि _ ग्रोथ मजबूत, है लेकिन आंकड़ों की पारदर्शिता को बेहतर बनाने की जरूरत है।

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