India-Russia Relations: राजनीतिक साझेदारी से खास और भरोसेमंद रिश्ते तक का सफर
भारत रूस संबंध राजनीति, अर्थव्यवस्था, रक्षा, संस्कृति और वैश्विक स्तर पर लगातार मजबूत होते जा रहे हैं, खासकर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की 4 दिसंबर से 5 दिसंबर 2025 की यात्रा से पहले। 2010 में बनाई गई विशिष्ट और सम्मानित राजनीतिक साझेदारी ने 2024-25 के बदले भू-राजनीतिक परिदृश्य में भी अपनी रफ्तार बनाए रखी है।
2010 मैं राजनीतिक साझेदारी शुरू होने के बाद से, दोनों देशों ने विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से सहयोग बढ़ाया है, जैसे राजनीतिक रक्षा ऊर्जा व्यापार विज्ञान तकनीक और व्यक्तिगत संबंध। भारत रूस इंटरगवर्नमेंटल कमिशन (IRIGC) जिसमें दो बड़े डिवीजन है IRIGC-TEC और IRIGC-M&MTC, अभी भी इस सहयोग का मुख्य मंच है। 2021 में शुरू हुआ 2+2 संवाद नीति निर्माण के प्रारूप को मजबूत कर रहा है।
दोनों देशों में राजनीतिक स्तर पर भी निरंतर संपर्कथा। जुलाई 2024 में मास्को में 22वीं सालाना सबमिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने India-Russia: Enduring and Expanding Partnership नामक संयुक्त बयान जारी किया। राजनीतिक आर्थिक सहयोग को 2030 तक बढ़ाना एक और बयान का विषय था। इसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी को रूस का सर्वोच्च सम्मान भी मिला। दोनों नेता अक्टूबर 2024 में BRICS समिट और सितंबर 2025 में SCO समिट में भी मिले, साथ ही कई टेलीफोन बातचीतें भी की, जिनमें पहलगाम हमले के बाद आतंकवाद पर चर्चा हुई।
अगस्त 2025, में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 26वीं IRIGC-TEC बैठक की सह-अध्यक्षता की। यहां 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डालर तक ले जाने की कोशिश की गई। भुगतान प्रणाली लॉजिस्टिक और भारत-EAEU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को अंतिम रूप देने पर चर्चा हुई। रूसी सेना में काम कर रहे भारतीयों को भी भारत में उठाया। साथ ही यूक्रेन, वेस्ट एशिया और अफगानिस्तान जैसे देशों की परिस्थितियों पर चर्चा हुई। जहां भारत ने बातचीत और कूटनीति के मार्ग का समर्थन दोहराया था।
2024-25 में भी रक्षा सहयोग मजबूत हुआ। जून 2025 में SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रूसी रक्षा मंत्री आंद्रे बेलोउसॉव से मुलाकात की दिसंबर 2024 की IRIGC-M&MTC बैठक भी महत्वपूर्ण थी। रूसी निर्मित फ्रीगेट INS Tushil और INS Tamal को भारत ने 2024 और 2025 में अपने बड़े में जोड़ा। रक्षा संबंध अब सिर्फ खरीद फरोख्त तक सीमित नहीं है; वे अब संयुक्त अनुसंधान विकास और निर्माण पर भी आधारित है, जैसे ब्राह्मण जैसे ब्रह्मोस, Su-30MKI, T-90 टैंक और AK-203 राइफल निर्माण। S-400 जैसे महत्वपूर्ण सिस्टम जो रूस से कई इंजनों और पुर्जों की आपूर्ति करता है, वो भी भारत को रूसी सहयोग से मिल रहा है।
2025 में भी सैन्य अभ्यास चलते रहे। INDRA-2025 सैन्य अभ्यास राजस्थान में हुआ, जबकि बंगाल की खाड़ी और चेन्नई में नौसैनिक अभ्यास हुए। रूस में चल रहे Zapad-2025 अभ्यास में भी भारतीय जवानों ने भाग लिया। अक्टूबर में एक प्रतिनिधिमंडल सैन्य-तकनीकी सहयोग पर कार्य समूह की बैठक में भाग लेने के लिए मास्को गया था।
ऊर्जा आयात के चलते आर्थिक संबंध भी तेजी से बढ़े हैं। 2024 से 25 तक, दोनों देशों का व्यापार रिकॉर्ड 6.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें भारत का निर्यात 4.9 अरब डॉलर और आयत 63.8 अरब डालर था। इसमें कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद, कोयला, खाद तेल और पेट्रोलियम उत्पाद शामिल थे। 2030 तक दोनों देशों ने 50 अरब डॉलर के सालाना निवेश और 2025 तक 100 अरब डॉलर के वार्षिक व्यापार का लक्ष्य रखा है। IRIGC-TEC कि अगस्त 2025 की बैठक में टैरिफ कनेक्टिविटी और 2030 तक के आर्थिक सहयोग कार्यक्रम पर चर्चा हुई।
बुनियादी विज्ञान से लेकर स्पेस और न्यूक्लियर एनर्जी तक, दोनों देशों ने Science and Technology में भी बहुत मजबूत सहयोग किया है। रूस ने भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को गगनयान मानव मिशन में प्रशिक्षण भी दिया है, जो कुडनकुलम परमाणु संयंत्र का प्रमुख साझेदारी है। दोनों देशों ने Science and Technology और नवाचार के नए मार्ग पर ध्यान केंद्रित किया है।
शिक्षा क्षेत्र में भी गहरे संबंध है। रूस में लगभग 20,000 भारतीय विद्यार्थी, अधिकांश मेडिकल की पढ़ाई पढ़ रहे हैं। EEP, RIN, SPARC और GAIN जैसे कार्यक्रम दोनों देशों के शिक्षण संस्थानों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। भारत में भी कई रूसी विद्यार्थी ITEC कार्यक्रमों में भाग लेते हैं।
भारत रूस के सांस्कृतिक संबंध पुराने हैं। योग कार्यक्रम संस्कृत समारोह और फिल्म फेस्टिवल हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ रहे हैं। 2025 में मास्को में आयोजित बड़ा Bharat Utsav और दूसरा भारतीय फिल्म फेस्टिवल बड़ी सफल रहे। भारत ने काल्मिकिया मैं भगवान बुद्ध की पवित्र वस्तुओं का प्रदर्शन किया और 2025 के मास्को इंटरनेशनल बुक फेयर में गेस्ट of Honour रहा।
मास्को स्थित जवाहरलाल नेहरू संस्कृतिक केंद्र, जो भारतीय संगीत, नृत्य और कला का प्रशिक्षण देता है और विश्वविद्यालयों से जुड़कर कार्यक्रम चलता है, एक-दूसरे के साथ संबंधों को मजबूत बनाता है। भारत में कई कार्यक्रम में रूसी सांस्कृतिक दल ने भी सक्रिय भागीदारी की है।
दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र, G20, BRICS और SCO जैसे
अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी गहरा तालमेल बनाया है। रूस भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता देना चाहता है। 2026 में भारत BRICS की अध्यक्षता करेगा, जिसमें संस्थागत सुधारो का ध्यान रखा जाएगा।
कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स पर भी दोनों देशों का तेजी से काम हो रहा है— खासकर पूर्वी रूस के साथ क्षेत्रीय संबंधों को बढ़ाने के लिए और उत्तर-दक्षिण परिवहन मार्ग, चेन्नई-व्लादिवोस्तोक नौसैनिक मार्ग और उत्तरी समुद्री मार्ग को विकसित करने के लिए।
13 अप्रैल 1947, भारत की स्वतंत्रता से चार महीने पहले, रूस और भारत के बीच राजनयिक संबंध शुरू हुए। यह साझेदारी बदलते दुनियां के हालात के बीच और परिपक्व हो रही है, अब जब दोनों देश अपनी 19वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। राष्ट्रपति पुतिन की दिसंबर की यात्रा से इन संबंधों की गहराई की जांच होगी और भविष्य में सहयोग की नई दिशा निर्धारित होगी।






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