UP में शिक्षामित्रों के लिए बड़ी राहत: गृह जनपद में तैनाती के आदेश जारी
सार
UP शिक्षामित्रों: प्रदेश के तीस हजार से अधिक शिक्षकों के लिए यह बड़ी राहत की खबर है। अब उन्हें अपने मूल शिक्षण संस्थानों में वापस जाने का अवसर मिलेगा।
विस्तार:
लंबे समय से चली आ रही शिक्षामित्रों की शीतकालीन छुट्टियों में अपने मूल विद्यालयों में लौटने की उम्मीद अब पूरी होती दिखाई देती है। सरकार ने मंगलवार को शिक्षकों को उनके मूल विद्यालयों में वापस भेजने का आदेश दिया है। इससे लगभग 30 हजार शिक्षक घर लौट सकेंगे। महिला शिक्षक इससे सबसे अधिक लाभ उठाएंगे। वे अपने ससुराल क्षेत्र या ग्राम सभा, ग्राम पंचायत या वार्ड में भी काम कर सकते हैं।
UP के बेसिक शिक्षा विभाग के विशेष सचिव अवधेश कुमार तिवारी ने एक आदेश जारी किया है कि शिक्षामित्रों से पहले निर्धारित फॉर्मेट पर जानकारी ली जाएगी। शिक्षामित्रों के लिए जो अपने वर्तमान स्थान पर ही रहना चाहते हैं, उनके विकल्पों में कोई बदलाव नहीं होगा। पुरुष या अविवाहित महिला शिक्षक जो अपने मूल स्थान पर जाने का निर्णय लेंगे, वहीं तैनाती मिल जाएगी।
यदि मूल कार्यस्थल पर कोई पद खाली नहीं है, तो उन्हें ग्राम सभा, ग्राम पंचायत या वार्ड के किसी स्कूल में तैनाती दी जाएगी। 3 जनवरी को जारी आदेश का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि ज़िला मजिस्ट्रेट (DM) की अध्यक्षता वाली समिति इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करेगी। इस समिति में मुख्य विकास अधिकारी (CDO), डायट प्रिंसिपल, बीएसए और सहायक वित्त और लेखाधिकारी शामिल होंगे।
यह महत्वपूर्ण है कि 3 जनवरी को सरकारी अधिसूचना जारी की गई, जिसमें शिक्षकों को उनके मूल विद्यालयों में स्थानांतरित करने और स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया गया था। 12 जून को इसके कार्यान्वयन के निर्देश भी जारी किए गए। इस आदेश का पालन करने में विभाग असफल रहा। उत्तर प्रदेश प्राइमरी शिक्षामित्र संघ ने हाल ही में चेतावनी दी कि अगर प्रक्रिया नहीं शुरू की गई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
उत्तर प्रदेश (UP) प्राइमरी शिक्षामित्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला ने कहा कि इस पहल से लगभग 30,000 शिक्षामित्रों को लाभ मिलेगा, जिन्हें अपने घरों के निकट तैनाती मिलेगी. उन्होंने सरकार का आभार व्यक्त किया। विभाग को जल्द से जल्द ज़िला स्तर पर प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।
विद्यालय में अधिकतम दो शिक्षामित्र पद
विशेष सचिव ने पहले जारी किए गए निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि हर विद्यालय में अधिकतम दो शिक्षक पदों की अनुमति है। वहीं, नक्सल प्रभावित स्कूलों में अधिकतम तीन शिक्षक पदों की अनुमति है। विभाग इस आधार पर रिक्तियों की गणना करेगा और फिर समायोजन करेगा।
यह प्रक्रिया को दो चरणों में पूरा किया जाएगा।
विभाग ने बताया कि शिक्षामित्रों का समायोजन दो चरणों में होगा। विद्यालयों में पद खाली होने या पास के किसी विद्यालय में स्थानांतरण करने के इच्छुक शिक्षकों को पहले चरण में अवसर मिलेगा। इसके बाद दूसरे चरण में समायोजन होगा। दूसरे चरण के लिए अलग-अलग दिशा-निर्देश भेजे जाएंगे।






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