O Romeo Movie Review Hindi: शाहिद कपूर का दमदार अभिनय, विशाल भारद्वाज की कमजोर कहानी
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O Romeo Movie Review Hindi: शाहिद कपूर का दमदार अभिनय, विशाल भारद्वाज की कमजोर कहानी

O Romeo एक रोमांटिक एक्शन ड्रामा है जिसे Vishal Bhardwaj ने निर्देशित किया है। फिल्म में Shahid Kapoor एक बेरहम हिटमैन के किरदार में नजर आते हैं। दमदार अभिनय और खूबसूरत शायरी के बावजूद, कमजोर कहानी फिल्म को पीछे खींच लेती है।

O Romeo Movie Review Hindi: शाहिद कपूर का दमदार अभिनय, विशाल भारद्वाज की कमजोर कहानी
SOURCE OF IMAGE: TRAILER SCREEN GRAB

O Romeo Movie Review Hindi: शाहिद कपूर का करियर-बेस्ट अभिनय, लेकिन विशाल भारद्वाज की कहानी रास्ता भटक जाती है

O Romeo Movie Review Hindi: बॉलीवुड में जब भी किसी शेक्सपियर से प्रेरित फिल्म की चर्चा होती है। तो सबसे पहले जिस नाम की याद आती है, वह है Vishal Bhardwaj

मक़बूल, ओमकारा और हैदर जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने यह साबित किया है कि शेक्सपियर के त्रासद नायकों को भारतीय समाज और राजनीति में किस खूबसूरती से ढाला जा सकता है। ऐसे में जब O Romeo की घोषणा हुई, तो उम्मीदें स्वाभाविक रूप से आसमान छूने लगीं।

लेकिन सवाल यही है– क्या O Romeo उन उम्मीदों पर खरी उतरती है? जवाब थोड़ा जटिल है। यह फिल्म अभिनय के स्तर पर जितनी ऊंची उड़ान भरती है, कहानी और पटकथा के मोर्चे पर उतनी ही लड़खड़ा जाती है।

कहानी: प्यार, बदला और अंडरवर्ल्ड का खूनी खेल

O Romeo Movie Review Hindi: O Romeo की कहानी मुंबई के अंडरवर्ल्ड की पृष्ठभूमि में रची गई है। यहां रोमियो उर्फ हुसैन उस्तरा एक बेरहम कॉन्ट्रैक्ट किलर है, जो इंटेलिजेंस एजेंसियों और अंडरवर्ल्ड– दोनों के लिए काम करता है। यह किरदार Shahid Kapoor ने निभाया है और यही फिल्म की सबसे बड़ी ताकत भी है।

रोमियो की जिंदगी में सब कुछ है– ताकत पैसा, शोहरत और औरतों की कमी नहीं। लेकिन उसकी जिंदगी तब बदलती है, जब उसकी मुलाकात अफ़शान से होती है। अफ़शान एक ऐसी महिला है, जिसने अपने पति को अंडरवर्ल्ड की हिंसा में खो दिया है और अब वह बदले की आग में जल रही है। अफ़शान का किरदार Triptii Dimri ने निभाया है, जो भावनात्मक दृश्यों में गहरी छाप छोड़ती हैं।

फिल्म का मूल संघर्ष यहीं से जन्म लेता है—एक पेशेवर कातिल और एक टूटे दिल वाली महिला का प्रेम, जो धीरे-धीरे बदले की कहानी में बदल जाता है।

शेक्सपियर की छाया और विशाल भारद्वाज की पहचान

O’ Romeo Movie Review Hindi: फिल्म में एक संवाद है जो इसके मिज़ाज को साफ कर देता है। अफ़शान कहती है कि वह मुज़फ्फरनगर की है, लेकिन उसका घराना ग्वालियर का है। उस्तरा जवाब देता है कि उसका घर लखनऊ है, लेकिन घराना मुंबई का। यह संवाद सीधे तौर पर निर्देशक की ओर इशारा करता है—घर बॉलीवुड है, लेकिन घराना शेक्सपियर।

O Romeo सीधे तौर पर Romeo and Juliet की कहानी नहीं है, बल्कि उससे भावनात्मक ढांचा उधार लेती है—जहां प्रेम अनिवार्य विनाश की ओर ले जाता है। यह विचार सुनने में जितना आकर्षक लगता है, पर्दे पर उतना असरदार साबित नहीं हो पाता।

अभिनय: शाहिद कपूर का एकतरफा जलवा

O Romeo Movie Review Hindi: अगर इस फिल्म को एक लाइन में समेटा जाए, तो कहा जा सकता है—यह शाहिद कपूर की फिल्म है।

शाहिद कपूर ने उस्तरा के किरदार में गज़ब की मेहनत की है। उनकी बॉडी लैंग्वेज, आंखों की हिंसा, रोमांस में मासूमियत और गुस्से में विस्फोट—सब कुछ बेहद प्रभावशाली है। यह कहना गलत नहीं होगा कि यह उनके करियर के बेहतरीन प्रदर्शनों में से एक है।

एक आइटम नंबर में Disha Patani के साथ शाहिद पूरी तरह स्क्रीन पर छा जाते हैं। वहीं, इंटेलिजेंस अफ़सर खान के रूप में Nana Patekar की मौजूदगी कुछ हल्के-फुल्के और यादगार पल देती है।

Triptii Dimri: भावनात्मक गहराई की कोशिश

त्रिप्ती डिमरी (Triptii Dimri) अफ़शान के किरदार में ईमानदार लगती हैं। दर्द गुस्सा और असहायता इन सबको वह अच्छे से निभाती हैं। हालांकि, पटकथा की कमजोरी के कारण उनका किरदार पूरी तरह खुल नहीं पाता। कई जगह ऐसा लगता है कि उनके हिस्से के दृश्य और मजबूत हो सकते थे।

खलनायक और सहायक कलाकार

फिल्म में जलाल नाम का किरदार जिसे Avinash Tiwary ने निभाया है। शुरुआत में खतरनाक लगता है, लेकिन धीरे-धीरे उसकी धार कुंद पड़ जाती है। वह एक ऐसे विलेन में बदल जाता है, जिसमें डर कम और शोर ज्यादा है।

Tamannaah Bhatia का किरदार सिर्फ सजावटी बनकर रह जाता है, जबकि उनसे कहीं ज्यादा उम्मीद थी। वहीं Hussain Dalal अपने वन-लाइनर्स से मुस्कान जरूर लाते हैं और Farida Jalal अपने छोटे से रोल में भी याद रह जाती हैं।

संगीत और शायरी: गुलज़ार का जादू, लेकिन अधूरा असर

विशाल भारद्वाज की फिल्मों में संगीत और शायरी हमेशा एक अहम भूमिका निभाते हैं। यहां भी Gulzar की पंक्तियां दिल को छूती हैं—
सांस भी दुबली लगती है, हल्का-हल्का फीवर है…”

लेकिन समस्या यह है कि ये पंक्तियां फिल्म को ऊपर उठाने की कोशिश तो करती हैं, पर कहानी का बोझ इतना भारी है कि असर पूरी तरह नसों तक नहीं पहुंच पाता।

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निर्देशन और पटकथा: यही है सबसे बड़ी कमजोरी

फिल्म की सबसे बड़ी समस्या इसकी 179 मिनट की लंबाई और भटकती हुई कहानी है। कई दृश्य गैर-जरूरी लगते हैं, कई सब-प्लॉट अधूरे रह जाते हैं। ऐसा महसूस होता है कि फिल्म विशाल भारद्वाज की शैली में तो बनी है, लेकिन उसमें वही तीखापन नहीं है, जो कमीने या हैदर में दिखता था।

मुंबई अंडरवर्ल्ड की कहानी अब जानी-पहचानी लगने लगी है—गैंगस्टर, इंटेलिजेंस एजेंसी, आतंकवाद और बदले की राजनीति। इसमें नया कुछ कम दिखाई देता है।

क्या O Romeo देखने लायक है?

अगर आप शाहिद कपूर के फैन हैं, तो यह फिल्म जरूर देखी जा सकती है। उनके अभिनय के लिए यह एक यादगार फिल्म है।
अगर आप विशाल भारद्वाज की पुरानी फिल्मों जैसी तीखी कहानी और भावनात्मक झटका ढूंढ रहे हैं, तो शायद आपको निराशा हो सकती है।

फाइनल वर्डिक्ट: ‘O’ Romeo’ एक ऐसी फिल्म है, जिसमें अभिनय शानदार है, शायरी खूबसूरत है, लेकिन कहानी और पटकथा उस स्तर तक नहीं पहुंच पाती, जिसकी उम्मीद विशाल भारद्वाज से की जाती है।

Disclaimer

यह रिव्यू लेखक की व्यक्तिगत राय पर आधारित है। दर्शकों की राय इससे भिन्न हो सकती है। फिल्म देखने से पहले अपने विवेक का प्रयोग करें

O Romeo – Official Trailer

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