New Years से पहले दिल्ली-NCR में गिग वर्कर्स की हड़ताल: फूड डिलीवरी और कैब सेवाओं पर असर

बुधवार को New Years की पूर्व संध्या पर जो आमतौर पर फूड डिलीवरी और ट्रांजिट एप्लीकेशन के लिए साल का सबसे व्यस्त दिन होता है। दिल्ली- NCR के निवासियों को हजारों गिग वर्कर्स की संभावित राज्यव्यापी हड़ताल के कारण देरी और ऑर्डर कैंसिल होने की समस्या हो सकती है।
गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स और कई दूसरे इंडिपेंडेंट वर्कर्स ने क्रिसमस के दौरान सर्विस में रुकावट डालने वाली ऐसी ही हरकतों के जवाब में हड़ताल का ऐलान किया है।
मज़दूरों का अनुभव
मज़दूरों ने दावा किया कि हालांकि कंपनियां खुद को “गिग-वर्कर सेंट्रिक” बताती हैं। लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और है। इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स का दावा है कि कंपनियां अपने कर्मचारियों की ज़िम्मेदारी लेने में नाकाम रही हैं।
क्योंकि हमें इंडिपेंडेंट पार्टनर कहा जाता है। इसलिए काम से जुड़े जोखिमों पर ध्यान नहीं दिया जाता। हमारे मेडिकल बिल और दुर्घटनाओं को पर्सनल खर्च माना जाता है। हड़ताल का मकसद इन समस्याओं की ओर ध्यान दिलाना है और हम अपील करते हैं कि एल्गोरिदम-बेस्ड सिस्टम को बंद किया जाए। एक वर्कर ने कहा 10 मिनट में डिलीवरी का जाल अव्यावहारिक है और वर्कर को जितना मिलता है। उससे ज़्यादा नुकसान होता है।
New Years से पहले- चांदनी चौक के 30 साल के एक मज़दूर नदीम ने बताया कि लगभग दस महीने पहले एक दुर्घटना के बाद उन्हें मुश्किल में छोड़ दिया गया था। जिससे वह कम से कम तीन महीने तक कोमा में रहे।
उन्होंने कहा कि उन्होंने इलाज के लिए ₹1 लाख से ज़्यादा खर्च किए और कंपनी ने उन्हें कोई मदद नहीं दी।
अमन जो एक और इंडिपेंडेंट कॉन्ट्रैक्टर है उन्होंने कड़ी मेहनत के बावजूद कम सैलरी मिलने पर नाराज़गी जताई। जाफराबाद के डिलीवरी पार्टनर ने अपनी ऐप स्क्रीन दिखाते हुए दावा किया कि सोमवार को शाम 4 बजे तक सात घंटे काम करने और ग्यारह ऑर्डर डिलीवर करने के बावजूद, उसकी कमाई सिर्फ़ ₹263 थी।
उसने दावा किया ऐप का एल्गोरिदम अस्थिर और अचानक बदलने वाला है। 10 से 12 घंटे काम करने के बाद कभी-कभी उतने ही ऑर्डर के लिए एक दिन में लगभग ₹1,000 कमाए जा सकते हैं।
राइड हेलिंग ऐप कैप्टन प्रभात कुमार वर्मा के अनुसार कंपनी का सिस्टम फूड डिलीवरी ऐप्स से अलग है।
प्लेटफ़ॉर्म फ़ीस हर राइड पर कम से कम 13% है। इस फ़ीस से बचने का एकमात्र तरीका कंपनी के इंसेंटिव खरीदना है। ये इंसेंटिव मोबाइल रिचार्ज की तरह काम करते हैं और रोज़ाना और हफ़्ते में दोनों तरह से मिलते हैं। कंपनी को कम से कम पेमेंट करने के बाद आप अपनी राइड पर बिना प्लेटफ़ॉर्म फ़ीस दिए एक निश्चित रकम कमा सकते हैं।
यह रिवॉर्ड एक तय समय के लिए वैलिड होता है। उदाहरण के लिए अगर आपने ₹125 दिए हैं। तो आप तीन दिनों में अपनी राइड पर बिना प्लेटफ़ॉर्म फ़ीस दिए ₹1400 कमा सकते हैं। वर्मा जी ने साफ़ किया ऐसे कई इंसेंटिव हैं लेकिन फ्यूल और गाड़ी के मेंटेनेंस के खर्च को देखते हुए आपको मिलने वाली रकम अभी भी बहुत कम है।
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