PM Kisan की 21 वीं किस्त के बाद किसानों के लिए एक और बड़ी खुशखबरी कृषि मंत्री बोले—अब PM Fasal Bima Yojana से भरपाई होगी!
PM Kisan की 21 वीं किस्त के बाद किसानों के लिए एक और बड़ी खुशखबरी कृषि मंत्री बोले—अब PM Fasal Bima Yojana से भरपाई होगी!

HIGHLIGHYS
PM Kisan की 21वीं किस्त जारी होने के तुरंत बाद केंद्र सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए एक और बड़ा फैसला लिया है।अब PM Fasal Bima Yojana (PMFBY) में ऐसे दो बड़े बदलाव किए गए हैं, जिनकी किसान लंबे समय से मांग कर रहे थे।
PM Kisan के किस्त देने के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की है कि PM Fasal Bima Yojana के तहत जंगली जानवर के हमले और अतिवृष्टि से होने वाले जलभराव से होने वाला फसल नुकसान भी अब बीमा के दायरे में शामिल किया जाएगा। यानी इन दोनों तरह के नुकसान की भरपाई सरकार के फसल बीमा के तहत की जाएगी।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने क्या कहा?
किसानों को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री ने कहा:
“किसान भाइयों और बहनों… आपकी दो सबसे बड़ी परेशानियों का हल कर दिया गया है। अब अगर खेत में जंगली जानवर फैसले नष्ट कर दें या भारी बारिश से खेत में पानी भर जाए, तो इसका पूरा मुआवजा सरकार देगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का संकल्प है कि कोई भी किसान बिना सुरक्षा के ना रहे।”
सरकार का कहना है कि देशभर में हाथी, जंगली सूअर, नीलगाय, हिरण और बंदरों जैसे जानवर हर साल लाखों किसानों की फैसले बर्बाद करते हैं। खासतौर पर जंगलों और वन्यजीव गलियारों के आसपास के गांव सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। अब इन नुकसान को Localize Risk की नई श्रेणी में शामिल कर लिया गया है।
नया नियम कब से लागू होगा?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नए नियम करीब 2026 से लागू होंगे। यानी 2026 के बाद होने वाले ऐसे नुकसान पर किसानों को अलग से किसी दफ्तर या अफसर के चक्कर नहीं काटने होंगे। सब कुछ बीमा कवर के अंदर ही निपट जाएगा I
किसान बीमा दावा कैसे कर पाएंगे?
बीमा दावा प्रक्रिया को भी आसान और पारदर्शी बनाया गया है:
- राज सरकार है या ताई करेगी कि उनके राज्य में किस जंगली जानवर से सबसे ज्यादा नुकसान होता है।
- संवेदनशील जिले और बीमा इकाइयों की पहचान भी राज खुद करेगा।
- फसल को नुकसान होने के 72 घंटे के भीतर, किस को PM Fasal Bima App पर जियो टैग फोटो अपलोड करनी होगी।
- मंत्रालय का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया को वैज्ञानिक और पारदर्शी रखा गया है ताकि किसान के दावे में देरी न हो।
धान की बाढ़ से होने वाला नुकसान भी कवर में वापस शामिल
2018 में धान की फसलों को बाढ़ से होने वाले नुकसान को बीमा से बाहर कर दिया गया था, क्योंकि इसका आकलन करना मुश्किल माना जाता था। इससे तटीय और बाढ़ प्रभावित इलाकों के किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था।
अब विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर सरकार ने इसे फिर से बीमा में शामिल कर लिया है। यानी जिन इलाकों में धान की फसल बाढ़से डूब जाती है, वहां के किसानों को अब फिर बीमा का लाभ मिलेगा।
किस-किस राज्य को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?
इस फैसले से खास तौर पर इन राज्यों के किसान लाभान्वित होंगे:
उड़ीसा,छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, उत्तराखंड, असम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश।
सरकार का कहना है कि इन बदलावों से लाखों किसानों को अब मजबूत सुरक्षा मिलेगी और उनकी आर्थिक चिंताएं काफी कम होगी।



