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तारागिरी: भारतीय नौसेना को मिली Project 17A की चौथी स्टेल्थ फ्रीगेट

तारागिरी: भारतीय नौसेना को मिली Project 17A की चौथी स्टेल्थ फ्रीगेट

तारागिरी: भारतीय नौसेना को मिली Project 17A की चौथी स्टेल्थ फ्रीगेट

भारत की नौसैनिक ताकत को बड़ा बूस्ट देते हुए भारतीय नौसेना को एक और आधुनिक और अत्याधुनिक युद्धपोत मिल गया है। 

मुंबई स्थित माझगांव डॉग शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने तारागिरी, नीलगिरी-क्लास (Project 17A) की चौथी स्टेल्थ फ्रीगेट भारतीय नौसेना को सौंप दी है। यह उपलब्धि भारत के नौसैनिक जहाज निर्माण के स्वदेशीकरण की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

INS Taragiri की विरासत को आगे बढ़ाती नई तारागिरी

नई तारागिरी जिसे यार्ड नंबर 12653 नाम दिया गया है, असल में पुराने INS Taragiri का आधुनिक अवतार है। 

पुरानी तारागिरी 1980 से 2013 तक पूरे 33 साल भारतीय नौसेना की सेवा में रही और कई मिशनों में अपनी क्षमता साबित की।
नई तारागिरी में वही मजबूती और विश्वनीयता तो है ही, इसके साथ इसमें अत्याधुनिक तकनीक, उन्नत स्टेल्थ फीचर्स, बेहतर ऑटोमेशन और अधिक सर्वाइवेबिलिटी जोड़ी गई है, जिससे यह आधुनिक युद्ध की जरूरत को पूरा करती है।

यह जहाज भारतीय नौसेना की Aatmanirbhar Bharat पहल के तहत भारत में ही डिजाइन और विकसित किया गया है। इसका डिजाइन नौसेना के Warships Design Bereau ने तैयार किया, जबकि उसके निर्माण की निगरानी मुंबई की Warship Overseeing Team ने की।

कम समय में निर्माण - बढ़ती दक्षता का परिणाम

Project 17A के तहत बनने वाली फ्रीगेट्स का निर्माण आधुनिक तकनीक Integrated Construction Methodology से किया जाता है। नौसेना के अनुसार, पहले दो जहाजों के निर्माण से मिली सीख का फायदा यह हुआ कि तरागिरी को बनाने में केवल 81 महीने लगे।
पहले नीलगिरी-क्लास फ्रिगेट Nilgiri के निर्माण में 93 महीने लगे थे। यह दिखाता है कि भारत जटिल युद्धपोतों के निर्माण में कितनी तेजी से सक्षम हो रहा है।

शक्तिशाली हथियारों और सेंसरों से लैस

तारागिरी को एक मल्टी-रोल युद्धपोत के तौर पर तैयार किया गया है। इसमें वह सभी आधुनिक हथियार और सेंसर लगाए गए हैं जो एक स्टेल्थ फ्रीगेट को बेहद घातक और प्रभावशाली बनाते हैं।

मुख्य हथियार प्रणाली:

• BrahMos मिसाइल सिस्टम – लंबी दूरी से सटीक वार करने वाली मिसल

• MF -STAR रडार – मल्टी फंक्शन रडार जो आसमान और समुद्र दोनों में खतरों को पकड़ सकता है।

• MRSAM एयर डिफेंस सिस्टम – हवाई हमले से बचाव के लिए

• 76mm Super Rapid Gun Mount – तेज और सटीक फायरिंग वाला मुख्य गन

• Close-in Weapon System (CIWS) – मिसाइलों और नजदीकी खतरों को रोकने के लिए

इसके अलावा इसमें एंटी सबमरीन रॉकेट, सोनार और टॉरपीडो सिस्टम भी लगाए गए हैं, जो पानी के अंदर चलने वाली दुश्मन पनडुब्बियों का पता लगाकर उन पर हमला कर सकते हैं। 

इस तरह तरह तारागिरी हवा समुंद्र और पानी के भीतर तीनों तरह के खतरों से निपटने में सक्षम है।

शक्तिशाली इंजन और बेहतर नियंत्रण

जहाज की रफ्तार और शक्ति को बढ़ाने के लिए इसमें CODOG (Combined Diesel Or Gas) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यानी इसमें डीजल इंजन के साथ गैस टरबाइन भी लगी है।

 दोनों मिलकर जहाज को तेज, शांत और ऊर्जा-सक्षम बनाते हैं। जहाज के संचालन को आसान बनाने के लिए इसमें Integrated Platform Management System लगाया गया है, जिससे सभी तकनीकी सिस्टम एक ही जगह से ऑटोमेटिक तरीके से नियंत्रित किए जा सकते हैं।

एक साल में चौथी P17A फ्रिगेट - तेजी से आगे बढ़ रहा भारतीय नौसेना कार्यक्रम

तारागिरी: भारतीय नौसेना को मिली Project 17A की चौथी स्टेल्थ फ्रीगेट

भारतीय नौसेना की खास बात यह है की तरागिरी पिछले 11 महीना में सौंपे गए Project 17A के चौथे जहाज है।

बाकी तीन जहाज़ अभी निर्माणाधीन हैं –

• एक (MDL) मुंबई में।

• और दो Garden Reach Shipbuilders & Engineers (GRSE) कोलकाता में।

सभी जहाजों की डिलीवरी अगस्त 2026 तक होने की उम्मीद है।

इसका मतलब है कि आने वाले दो वर्षों में भारतीय नौसेना की ताकत और बढ़ेगी, और भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करेगा।

75% स्वदेशीकरण - भारत में हजारों लोगों को मिला रोजगार

Project 17A की एक और खास उपलब्धि इसका 75% घरेलू कंटेंट है। यानी इस जहाज में इस्तेमाल होने वाला अधिकांश उपकरण, सामग्री, तकनीक और सिस्टम भारत में ही विकसित या निर्मित किए गए हैं।

इस परियोजना ने—

• 200 से अधिक MSMEs को जोड़ा

• करीब 4000 लोगों को सीधा रोजगार मिला

• और 10000 से अधिक लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से काम मिला।

यह बताता है कि ऐसे बड़े रक्षा प्रोजेक्ट सिर्फ सैन्य ताकत नहीं बढ़ते, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और उद्योग जगत को भी मजबूत करते हैं।

तारागिरी —भारत की भविष्य की नौसेना की झलक

नई तारागिरी सिर्फ एक जहाज नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता, कौशल और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।

जहां पहले उन्नत युद्धपोतों के लिए भारत को स्वदेशी तकनीक पर निर्भर रहना पड़ता था। वहीं अब भारत खुद ऐसी आधुनिक फ्रीगेट बना रहा है जो दुनिया के बेहतरीन जहाज के मुकाबले खड़ी हो सकती है।

Project 17A के जहाज न सिर्फ स्टेल्थ टेक्नोलॉजी और मल्टी रोल ऑपरेशन में सक्षम है, बल्कि वे आधुनिक युद्ध की सबसे कठिन स्थितियों में भी लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए डिजाइन किए गए हैं।

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सोनागाछी में SIR प्रक्रिया: 2002 की फैमिली हिस्ट्री से जूझती सेक्स वर्करें

सोनागाछी में SIR प्रक्रिया: 2002 की फैमिली हिस्ट्री से जूझती सेक्स वर्करें

सोनागाछी में SIR प्रक्रिया: 2002 की फैमिली हिस्ट्री से जूझती सेक्स वर्करें
image credit: (Photo: ITG)

कोलकाता का सोनागाछी में SIR प्रक्रिया:—एशिया का सबसे बड़ा रेड लाइट एरिया। यहां रहने वाली हजारों महिलाओं के सामने इन दिनों एक नई चुनौती खड़ी हो गई है:

2002 की पारिवारिक जानकारी यानी फैमिली हिस्ट्री कैसे साबित करें?

बंगाल चुनाव से पहले शुरू हुई SIR — Special Intensive Revision भीम ने इन महिलाओं के लिए पहचान बचाने का सवाल खड़ा कर दिया है। जिनके लिए अपना नाम वोटर लिस्ट में बनाए रखना ही सबसे बड़ी लड़ाई बन गया है।

पुराने बच्चों से धूल भरे कागज तक — पहचान की जद्दोजहद

सोनागाछी में इन दोनों अजीब सी बेचैनी है।
जो महिलाएं कभी अपनी अतीत को भूल कर आगे बढ़ना चाहती थी, आज वही पुरानी यादों और पुराने बक्सों में छिपे कागज तलाशने को मजबूर है।

हर महिला के हाथ में एक ही सवाल है:

2002 का कौन सा दस्तावेज दिखाएं?

मां-बाप का नाम कैसे साबित करें जब उनसे रिश्ता ही नहीं रहा?

10000 से ज्यादा सेक्स वर्करों से भरे इस इलाके में ज्यादातर महिलाओं के पास:

• ना पिता का पता

• न घर का कोई कागज

• न पुरानी वोटर लिस्ट से खुद को जोड़ने का कोई तरीका

 

कई महिलाओं की कहानी ऐसी है कि वे तस्करी के जरिए यहां लाई गई, किसी के पास कोई दस्तावेज नहीं।

बहुत सी लड़कियां घर से भागकर यहां पहुंची— उन्हें अपने परिवार का नाम पता है, लेकिन 2002 की वोटर लिस्ट से जानकारी निकालना उनके लिए नामुमकिन है।

परिवार से रिश्ता टूट चुका है। ऐसे में 23 साल पुराना रिकॉर्ड कहां से लाया जाए?

2002 की वोटर लिस्ट — क्यों है इतनी अहम?

SIR प्रक्रिया में नियम साफ है:


2002 की वोटर लिस्ट को बेसलाइन मानकर ही मौजूद वोटर लिस्ट अपडेट होगी।

यानी आज का कोई भी व्यक्ति तभी आसानी से नए वोटर लिस्ट में नाम जोड़ सकता है यदि:

 

• 2002 की लिस्ट में उसका

• या उसके माता-पिता का

• या किसी रिश्तेदार का नाम मौजूद हो।

 

लेकिन सोनागाछी की ज्यादातर महिलाओं के लिए पूरी प्रक्रिया लगभग असंभव है।

क्योंकि 2002 में उनके पास:

• पहचान पत्र नहीं थे
• वोटर आईडी नहीं थी
• कई महिलाएं उसे समय अपने परिवार से अलग हो चुकी थी

ऐसे में पुरानी लिस्ट में अपने परिवार को ढूंढना एक बंद गली जैसा लगता है

NGOs का कहना — इनसे 2002 के दस्तावेज मांगना ना इंसाफी है

सोनागाछी में SIR प्रक्रिया: 2002 की फैमिली हिस्ट्री से जूझती सेक्स वर्करें

सोनागाछी में सेक्स वर्करों के लिए काम करने वाली संस्था दरबार महिला समन्वय समिति की सचिव विशाखा लश्कर का कहना है:

• “2002 में इन महिलाओं को पहली बार वोटर ID मिले थे।”
• “कई महिलाएं तब तक अपने घर से रिश्ता तोड़ चुकी थी।”
• “आज उनके पास आधार, पेन, राशन कार्ड जैसे नए दस्तावेज है–इनका ही मान्य किया जाना चाहिए।”

उनका तर्क साफ है—
23 साल पुराने कागज दिखाना संभव ही नहीं, फिर पहचान कैसे बचेगी?

चुनाव आयोग ने लिया संज्ञान — सोनागाछी में लगेगा विशेष कैंप

सेक्स वर्करों की स्थिति को देखते हुए चुनाव आयोग ने बड़ा कदम उठाया है।
अब सोनागाछी में स्पेशल हियरिंग कैंप लगाए जाएंगे।

चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारी ने स्वीकार किया है कि:

• कई महिलाओं के पास 2002 की कोई जानकारी नहीं है

• कई कभी माता-पिता के साथ रही ही नहीं

• कई के परिवार ने उन्हें छोड़ दिया था

• कई के घर से आज भी संपर्क नहीं

 

ऐसे मामलों में महिलाएं फॉर्म तो भर रही है, लेकिन 2002 की लिस्ट से लिंक नहीं मिल रहा

इसी वजह से आयोग ने फैसला किया है कि:

• 9 दिसंबर को ड्राफ्ट लिस्ट आने के बाद
• सोनागाछी में विशेष सुनवाई होगी
• अधिकारी खुद कैंप में जाकर महिलाओं के केस सुनेंगे

NGO जैसे अमर पदातिक, उषा मल्टीपर्पस कोऑपरेटिव सोसाइटी आदि ने भी आयोग से ही यही मांग की थी।

क्या होगा आगे?

सोनागाछी में SIR प्रक्रिया: 2002 की फैमिली हिस्ट्री से जूझती सेक्स वर्करें
image credit: (freepik)

9 दिसंबर 2025: ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी

• जिनका नाम नहीं होगा, वह 8 जनवरी 2026 तक आपत्ति दर्ज कर सकेंगे

7 फरवरी 2026 : अंतिम वोटर लिस्ट जारी होगी

चुनाव नजदीक है और प्रशासन चाहता है कि किसी महिला का नाम सिर्फ दस्तावेजी समस्या की वजह से न कट जाए ।

इसलिए स्पेशल कैंप का मकसद है:

• मौके पर ही जांच

• सच्चे और योग्य मामलों की तुरंत मंजूरी

• ताकि सेक्स वर्करों का वोटिंग अधिकार सुरक्षित रहे

निष्कर्ष :

सोनागाछी की महिलाएं पहले ही जीवनभर की चुनौतियों का बोझ ढो रही हैं।

ऐसे में 23 साल पुराने कागज ढूंढना उनके लिए लगभग असंभव है।

SIR की यह प्रक्रिया उन्हें एक और पहचान संकट में ना धकेल दे इसी डर से पुरा इलाके में चिंता बढ़ रही है

अब उम्मीद चुनाव आयोग के इन स्पेशल कैंपों पर टिकी है, जो शायद इन महिलाओं को उनकी पहचान, उनके अधिकार और उनका सम्मान वापस दिला सके।

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कैबिनेट: ने महाराष्ट्र और गुजरात में दो बड़े रेलवे प्रोजेक्ट को मंजूरी दी – यात्रियों और उद्योगों को मिलेगा सीधा फायदा

कैबिनेट: ने महाराष्ट्र और गुजरात में दो बड़े रेलवे प्रोजेक्ट को मंजूरी दी – यात्रियों और उद्योगों को मिलेगा सीधा फायदा

कैबिनेट :ने महाराष्ट्र और गुजरात में दो बड़े रेलवे प्रोजेक्ट को मंजूरी दी – यात्रियों और उद्योगों को मिलेगा सीधा फायदा

भारत में रेल नेटवर्क को और मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) की बैठक में महाराष्ट्र और गुजरात में दो महत्वपूर्ण मल्टी- ट्रैकिंग रेलवे परीयोजनाओं को मंजूरी दे दी गई है। 

इन दोनों प्रोजेक्ट्स की कुल लागत लगभग ₹2781 करोड़ है। सरकार का कहना है कि इसे न केवल रेल लाइन की क्षमता बढ़ेगी, बल्कि ट्रेनों की गति, सुरक्षा और संचालन की दक्षता में भी बड़ा सुधार देखने को मिलेगा

यह दोनों प्रोजेक्ट्स मिलकर भारतीय रेल नेटवर्क में लगभग 224 किलोमीटर नई क्षमता जोड़ेंगे। 

इससे जहां महाराष्ट्र के मुंबई उप नगरीय नेटवर्क पर भीड़ कम होगी, वहीं गुजरात में लाखों लोगों को तेज और सुविधाजनक रेल संपर्क मिलेगा

दो बड़े प्रोजेक्ट: कहां और क्या काम होगा?

1. देवभूमि द्वारका (ओखा) कानालुस सेक्शन डबलिंग (141 किमी)

यह परियोजना गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस 141 किलोमीटर लंबे रेल सेक्शन को डबल लाइन में बदला जाएगा। वर्तमान में यहां एक ही ट्रैक है, जिससे ट्रेनों का ट्रैफिक बढ़ने पर देरी की समस्या होती है

डबल लाइन बनने के बाद ट्रेनों का परिचालन सुचारू होगा, अधिक ट्रेनें चलाई जा सकेंगी और यात्रियों को यात्रा समय में कमी का फायदा मिलेगा।

ये डबलिंग क्यों जरूरी है?

• द्वारकाधीश मंदिर तक पहुंचने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए बेहतर कनेक्टिविटी

• सौराष्ट्र क्षेत्र के विकास में तेजी

• उद्योगों और बंदरगाहों के बीच माल ढुलाई को बढ़ावा

• संचालन में देरी कम होगी और ट्रेनों की समयबद्धता सुधरेगी

इसके पूरा होने के बाद पूरे इलाके में विकास का नया अध्यक्ष शुरू होने की उम्मीद है।

2. बदलापुर- करजात तीसरी और चौथी लाइन (32 किमी)

महाराष्ट्र के लिए स्वीकृत दूसरी परियोजना काफी रणनीतिक है। मुंबई महानगर क्षेत्र में रोजाना लाखों लोग लोकल ट्रेन में सफर करते हैं। बदलापुर-करजात सेक्शन को तीसरी और चौथी लाइन से लैस किया जाएगा। कुल लंबाई लगभग 32 कमी है।

इस लाइन का महत्व क्या है?

•मुंबई सबर्बन नेटवर्क पर बढ़ता दबाव कम होगा
• लोकल और एक्सप्रेस ट्रेनों के अलग-अलग ट्रैक होने से दोनों की रफ्तार बढ़ेगी
• करजात के आगे दक्षिण भारत की ओर जाने वाली ट्रेनों के लिए भी सुविधा बढ़ेगी
• यात्रा समय घटेगा और लोकल ट्रेन ज्यादा चलाई जा सकेंगी

यह परियोजना मुंबई में बढ़ते आवागमन और कनेक्टिविटी की जरूरत को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभाएगी।

कितने लोग होंगे लाभान्वित?

रेल मंत्रालय के अनुसार, इन दोनों प्रोजेक्टस से 585 गांवों को सीधा फायदा होगा।

 इन गांवों की कुल जनसंख्या लगभग 32 लाख (3.2 मिलियन) है। यानी लाखों लोग बेहतर, तेज और सुरक्षित रेल सुविधा का उपयोग कर सकेंगे।

PM गति शक्ति योजना के तहत तेजी पकड़ेगी परियोजनाएं

कैबिनेट: ने महाराष्ट्र और गुजरात में दो बड़े रेलवे प्रोजेक्ट को मंजूरी दी – यात्रियों और उद्योगों को मिलेगा सीधा फायदा

दोनों रेलवे प्रोजेक्ट्स PM Gati Shakti National Master Plan का हिस्सा हैं। 

इस योजना का मुख्य उद्देश्य है:

• मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी बढ़ाना

• लॉजिस्टिक लागत कम करना

• उद्योगों और परिवहन क्षेत्रों को एक साथ जोड़ना

• ढांचागत सुविधाओं को आधुनिक बनाना

 

गति शक्ति योजना की वजह से इन प्रोजेक्ट को तेज गति से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

आर्थिक विकास में बड़ा योगदान

रेल मंत्रालय के मुताबिक, इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद क्षमता में भारी वृद्धि होगी। इससे माल ढुलाई को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा

18 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता

इन नई लाइनों से रेलवे हर साल 18 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढो सकेंगी। इस रूट पर पहले से ही कोयला, पेट्रोलियम उत्पाद, नमक, सीमेंट, कंटेनर और अन्य प्रमुख वस्तुएं बड़े पैमाने पर परिवहन की जाती है।

मालगाड़ियों की बड़ी क्षमता से:

• उद्योग में तेजी

• कम लागत में सामान की डिलीवरी

• आयात पर निर्भरता कम

• व्यापार में वृद्धि जैसे फायदे साफ तौर पर दिखाई देंगे।

पर्यावरण को भी बड़ा फायदा

सरकार ने बताया कि इन प्रोजेक्टस से पर्यावरण को भी उल्लेखनीय लाभ होगा।

मुख्य पर्यावरणीय फायदे:

• 3 करोड़ लीटर तेल की बचत

• 16 करोड़ किलो कार्बन उत्सर्जन में कमी

• यह कमी 64 लाख पेड़ लगाने के बराबर

रेल मार्ग को अधिक सक्षम बनाने से लंबी दूरी की सड़क परिवहन पर निर्भरता कम होगी। सड़कों पर कम ट्रैक दौड़ेंगे, जिससे प्रदूषण भी घटेगा।

धार्मिक और स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा

खासकर गुजरात में देवभूमि द्वारका प्रोजेक्ट धार्मिक पर्यटन के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। द्वारकाधीश मंदिर हर साल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

डबलिंग के बाद:

• यात्रियों को अधिक रेल विकल्प मिलेंगे
•सफर आरामदायक होगा
• बड़ी संख्या में पर्यटक आसानी से द्वारका पहुंच सकेंगे

इससे स्थानीय दुकानों, होटलों, टैक्सियों और अन्य सेवाओं को भी बढ़ावा मिलेगा।

मुंबई शहरी क्षेत्र की बड़ी समस्या का समाधान

बदलापुर–करजात सेक्शन की तीसरी और चौथी लाइन
को मुंबई की लाइफलाइन यानी लोकल ट्रेन नेटवर्क की एक तरह से रीढ़ माना जा रहा है।

दैनिक यात्रियों (डेली कंप्यूटर) के लिए इससे:

• भीड़ कम होगी
• अधिक लोकल ट्रेनें चलाई जा सकेंगी
• तकनीकी बढ़ाएं कम होगी
• फास्ट और स्लो ट्रेनों का संचालन आसान होगा

यह प्रोजेक्ट मुंबई जैसे विशाल महानगर की ट्रांसपोर्ट लाइफ को नए स्तर पर ले जा सकता है।

परियोजनाओं से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे

ऐसी बड़ी रेलवे परियोजनाएं केवल परिवार ही नहीं सुधारतीं, बल्कि हजारों लोगों को रोजगार भी देती हैं।
निर्माण कार्य, इंजीनियरिंग, मशीनरी, सामग्री आपूर्ति,
सुरक्षा से जुड़े कार्यों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं।

यह परियोजनाएं:

• प्रत्यक्ष रोजगार (कंट्रक्शन साइट पर)
• अप्रत्यक्ष रोजगार (कैटरिंग, स्टील, सीमेंट उद्योग)
• स्थानीय बाजार और अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन

 जैसे लाभ भी देगी।

लंबी दूरी की ट्रेन होंगी समय पर

मल्टी-ट्रैकिंग का सबसे बड़ा फायदा यही है कि ट्रेनें एक ही लाइन पर अटकती नहीं है। कई एक्सप्रेस ट्रेनों को रुकना पड़ता है क्योंकि उसे समय सामने से आने वाली या पीछे से आने वाली गाड़ियां उसी ट्रैक पर होती हैं।

डबल और मल्टी लाइनों के बाद:

 • काम लाइन कंजेशन
• ट्रेनों का बेहतर फ्री-फ्लो
• समय पर पहुंचने की संभावना बढ़ेगी
• दोनों राज्यों में रेल यात्रा और भरोसेमंद होगी

अंत में — इन दोनों प्रोजेक्ट्स से बदल जाएगा कनेक्टिविटी का चेहरा
महाराष्ट्र और गुजरात दोनों ही आर्थिक और औद्योगिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण राज्य है। ऐसे में इंदौर परियोजनाओं का असर सिर्फ रेल अधोसंरचना पर नहीं पड़ेगा, बल्कि पूरा क्षेत्र इससे लाभान्वित होगा।

इन प्रोजेक्ट से:

• यात्रियों को आरामदायक यात्रा

• उद्योगों को तेज सप्लाई चैन

• धार्मिक पर्यटन में तेजी

• पर्यावरण संरक्षण 

• रोजगार के अवसर 

• और समग्र आर्थिक विकास 

जैसे लाभ मिलने वाले हैं!

 

सरकार का दावा है कि दोनों प्रोजेक्ट 23 में से पूरे किए जाएंगे और आने वाले वर्षों में यह देश की रेलवे क्षमता को नए आयाम देंगे।

Google ने भारत में पहला AI Hub लॉन्च किया, 15 बिलियन डॉलर का बड़ा निवेश

Google ने भारत में पहला AI Hub लॉन्च किया, 15 बिलियन डॉलर का बड़ा निवेश

Google ने भारत में पहला AI Hub लॉन्च किया, 15 बिलियन डॉलर का बड़ा निवेश
माननीय मंत्रियों के साथ AI Hub की घोषणा।

नई दिल्ली 14 अक्टूबर 2025:
Google ने आज घोषणा की है कि वह आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम (विजाग) में भारत का पहला Artificial Intelligence (AI) Hub स्थापित कर रहा है। यह अब गूगल की पूरी आई टेक्नोलॉजी मजबूत डाटा सेंटर क्षमता, बड़े ऊर्जा स्रोत और हाई-स्पीड फाइबर नेटवर्क को एक जगह लाकर भारत में AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल को और आगे बढ़ाएगा।

यह निवेश लगभग 15 बिलियन डॉलर का है जो 2026 से 2030 तक किया जाएगा यह गूगल द्वारा भारत में किया गया सबसे बड़ा निवेश है और सरकार के विकसित भारत 2047 के विजन से मेल खाता है।

एक रिपोर्ट के अनुसार इस, AI हब से एआई और क्लाउड सेवाओं के बढ़ते उपयोग की वजह से अगले 5 सालों में अमेरिकी जीडीपी में भी लगभग 15 बिलीयन डॉलर का आर्थिक प्रभाव पड़ेगा। यानी यह निवेश भारत और अमेरिका दोनों के लिए बड़ी आर्थिक और तकनीकी संभावनाएं लेकर आएगा।

यह घोषणा नई दिल्ली में आयोजित Bharat AI Shakti इवेंट में की गई, जो India-AI Impact Summit 2026 का प्री-इवेंट था।

देश के बड़े नेताओं और गूगल के शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी

कार्यक्रम में कई प्रमुख नेता और अधिकारी उपस्थित थे, जिनमें शामिल है:

 

    • अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण, और इलेक्ट्रॉनिक्स & IT मंत्री

 

    • निर्मला सीतारमण, वित्त मंत्री

 

    • एन चंद्रबाबू नायडू, मुख्यमंत्री आंध्र प्रदेश

 

    • नारा लोकेश, IT मंत्री आंध्र प्रदेश

 

    • थॉमस कुरियन, CEO, Google Cloud

सभी नेताओं ने इस निवेश को भारत के डिजिटल भविष्य के लिए ऐतिहासिक कदम बताया।

नेताओं ने क्या कहा?

"मैं Google को 15 बिलियन डॉलर के इस बड़े निवेश के लिए धन्यवाद देता हूं। यह इंफ्रास्ट्रक्चर हमारे India AI मिशन को मजबूत करेगा। हमें खुशी है कि Google स्किल डेवलपमेंट और अपस्किलिंग को अपनी प्राथमिकता बना रहा है। AI सेवाएं हमारी डिजिटल अर्थव्यवस्था की नई कैटेगरी बन रही है।"

"यह निवेश आंध्र प्रदेश और भारत के डिजिटल परिवर्तन के लिए नई शुरुआत है। हमें गर्व है कि देश का पहला गीगावॉट-स्केल डाटा सेंटर और Google का पहला भारतीय AI Hub हमारे राज्य में बन रहा है।"

"विशाखापट्टनम में Google का AI Hub भारत के डिजिटल भविष्य के लिए एक अहम कदम है। बड़े पैमाने पर विश्व-स्तरीय AI इंफ्रास्ट्रक्चर से हम नवाचार को तेज कर रहे हैं और समावेशी विकास के नए अवसर बना रहे हैं।

भारत में AI को तेजी देने वाला मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर

विजाग का नया AI हब:

    • गीगावॉट-स्केल डेटा सेंटर

 

    • हाई परफार्मेंस कंप्यूटिंग

 

    • लो-लेटेंसी AI सेवाएं

 

    • बड़े अस्तर की ऊर्जा परियोजनाएं

 

    • मजबूत फाइबर नेटवर्क

 

शामिल करेगा, जिसमें भारतीय कंपनियां, स्टार्टअप्स और रिसर्च टीमें अपनी AI एप्स और सेवाओं को और तेजी से विकसित कर पाएंगी।

यह हब Google के 12 देशों में फैले ग्लोबल AI डेटा सेंटर के नेटवर्क में शामिल हो जाएगा और भारत के Bengaluru, Hyderabad और Pune स्थिति R&D सेंटर इसमें तकनीकी योगदान देंगे।

भारत के लिए नया Subsea Internet Gateway

Google ने भारत में पहला AI Hub लॉन्च किया, 15 बिलियन डॉलर का बड़ा निवेश
विशाखापत्तनम में समुद्र के अंदर नई केबल बिछाने से इंटरनेट कनेक्टिविटी और तेज होगी। यह कदम भारत की डिजिटल नेटवर्क सिस्टम को और मजबूत और सुरक्षित बनाएगा।

गूगल अपने AI हब के साथ एक नया अंतरराष्ट्रीय Subsea इंटरनेट गेटवे भी बना रहा है, जिसमें कई अंतरराष्ट्रीय केबल सीधे विजाग तट पर आएंगी

इससे:    

    • भारत का इंटरनेट और तेज होगा


    • मुंबई और चेन्नई पर निर्भरता कम होगी


    • डिजिटल नेटवर्क की क्षमता और सुरक्षा बढ़ेगी


    • देशभर में आई सेवाएं और सुगम होगी

 

विजाग अब भारत के पूर्वी तट पर एक बड़ा ग्लोबल कनेक्टिविटी हब बनेगा।

ऊर्जा क्षमता बढ़ाने पर भी बड़ा फोकस

Google भारत में अपने AI Hub को साफ और टिकाऊ ऊर्जा से चलने के लिए:

    • नई बिजली लाइनों

 

    • क्लीन एनर्जी प्लांट्स

 

    • ऊर्जा भंडारण प्रणाली

पर काम करेगा। इससे भारत की बिजली व्यवस्था मजबूत होगी और ग्रीन एनर्जी के उपयोग में भी बढ़ोतरी होगी।

 

Google के बारे में

Google का मिशन है — दुनिया की जानकारी को व्यवस्थित करना और हर किसी के लिए उसे सुलभ और उपयोगी बनाना। Search, Maps, Android, YouTube, Workspace और Google Cloud जैसे प्लेटफार्म आज दुनिया भर में अर्बन लोगों की रोजमर्रा की गिनी का हिस्सा है। Google, Alphabet Inc. की सहायक कंपनी है।

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2025 Tata Sierra: Tata Motors का बड़ा बदलाव, नई तकनीक और दमदार फीचर्स के साथ वापसी

2025 Tata Sierra: Tata Motors का बड़ा बदलाव, नई तकनीक और दमदार फीचर्स के साथ वापसी

2025 Tata Sierra: Tata Motors का बड़ा बदलाव, नई तकनीक और दमदार फीचर्स के साथ वापसी
Upcoming Tata Car in November 2025, Credit (S-M)

2025 Tata Sierra एक बार फिर मार्केट में लौट आई है, और इस बार यह सिर्फ पुरानी यादों को ताज़ा करने के लिए नहीं आई, बल्कि Tata Motors ke लिए कई नए “पहली बार वाले फीचर्स लेकर आई है। नए टेक, नए इंजन और एक बिल्कुल नए प्लेटफार्म के साथ, Sierra कंपनी के लिए एक बड़ा कदम साबित हो रही है।

नए Sierra की शुरुआत कीमत ₹ 11.49 लाख (एक्स- शोरूम) रखी गई है। SUV को Tata की ICE लाइन-अप में Curvv और Harrier के बीच पोजीशन किया गया है। अभी तक सिर्फ बेस वेरिएंट की कीमत बताई गई है।

ट्रिपल-स्क्रीन का कमाल

Tata पहली बार किसी SUV में तीन स्क्रीन वाला डैशबोर्ड दे रही है, जो केबिन को काफी आधुनिक और प्रीमियम एहसास देता है।

     • 10.25- इंच डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर

     • 12.3- इंच सेंट्रल टचस्क्रीन

     • 12.3- इंच पैसेंजर डिस्प्ले

बड़ी स्क्रीन पैसेंजर के लिए मिररिंग और कंटेंट सिंकिंग की सुविधा भी देती है, जो आमतौर पर सिर्फ लग्जरी कारों में देखने को मिलती है।

पहली बार: AR बेस्ड HUD (हेड-अप डिस्प्ले)

Tata Sierra भारत में पहली इसी ICE सब बन गई है, जिसमें Augmented Reality HUD दिया गया है।

यह पारंपरिक HUD की तरह एक छोटे डिस्प्ले पर प्रोजेक्ट नहीं करता, बल्कि सीधे विंडस्क्रीन पर नेविगेशन, वार्निंग और गाइडेंस दिखाता है। इससे ड्राइविंग और भी आसान और सुरक्षित बनती है।

“यह फीचर Accomplished वेरिएंट में मिलता है,जबकि Accomplished+ में आर हुड की जगह ट्रिपल- स्क्रीन लेआउट आता है।”

दो नए पेट्रोल इंजन – पहली बार

नई Sierra में Tata ने बिल्कुल नई 1.5- लीटर पेट्रोल इंजन फैमिली पेश की है।

1.1.5-लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड इंजन

    • पावर: 106 bhp

    • टॉर्क: 145 Nm

    • गियरबॉक्स: 6-स्पीड मैनुअल/ 7-स्पीड DCT ऑटोमैटिक

2. 1.5-लीटर टर्बो पेट्रोल इंजन
    • पवार: 160 bhp

    •टॉर्क: 255 Nm

    • गियरबॉक्स:6-स्पीड टॉर्क कन्वर्टर ऑटोमेटिक

यह टर्बो इंजन जल्द ही Harrier और Safari में भी आएगा। इसके अलावा,Sierra में 1.5 लीटर डीजल इंजन भी मिलेगा, जो Curvv वाले इंजन से 20 Nm ज्यादा टॉर्क देता है।

नया ARGOS प्लेटफार्म –बेहद प्लेक्सिबल

2025 Tata Sierra: Tata Motors का बड़ा बदलाव, नई तकनीक और दमदार फीचर्स के साथ वापसी
Tata Sierra 2025 Launch Update (credit-sm)

Sierra पहली कार है जो Tata के नए ARGOS प्लेटफार्म पर बनी है। इसका पूरा नाम है:
ऑल-terrain Ready, Omni-Energy, Geometry Scalable Architecture

यह प्लेटफॉर्म भविष्य में कई तरह की तकनीकी को सपोर्ट करेगा:

    • AWD (ऑल – व्हील ड्राइव)

    • CNG

    • स्ट्रांग हाइब्रिड

    • इलेक्ट्रिक वर्जन

फिलहाल साइट सिर्फ फेड में आती है, लेकिन आने वाले समय में AWD और Electric वर्ज़न भी पेश किए जाएंगे।

पहली बार: Extendable थाई स्पोर्ट

कंफर्ट के मामले में भी नया Sierra कमाल दिखती है।
Tata पहली बार किसी SUV में फ्रंट सीट्स के लिए Expendable Under-Thigh Support दे रही है।

यह फीचर खासकर लंबी यात्राओं में थकान काम करता है और इस सेगमेंट में किसी भी SUV में यह सुविधा नहीं मिलती।

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SUBODH KUMAR

धर्मेंद्र नहीं रहे: 89 साल की उम्र में मुंबई स्थित घर पर हुआ निधन, बॉलीवुड में शोक की लहर

धर्मेंद्र नहीं रहे: 89 साल की उम्र में मुंबई स्थित घर पर हुआ निधन, बॉलीवुड में शोक की लहर

धर्मेंद्र नहीं रहे: 89 साल की उम्र में मुंबई स्थित घर पर हुआ निधन, बॉलीवुड में शोक की लहर
धर्मेंद्र का निधन : अभिनेता दो हफ्ते पहले अस्पताल में भर्ती हुए थे और सोमवार को उनका निधन हो गया

बॉलीवुडके दिग्गज और सभी के प्रिय कलाकार धर्मेंद्र का 89 साल की उम्र में मुंबई में निधन हो गया। कुछ ही दिनों बाद वे अपना 90 वां जन्मदिन मनाने वाले थे। He Man of Bollywood कहलाने वाले धर्मेंद्र ने 60 से अधिक सालों के शानदार कैरियर में 300 से ज्यादा फ़िल्मों में काम किया और करोड़ो दिलों पर राज किया।

हाल ही में उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल से छुट्टी मिली थी और कहा जा रहा था कि उनकी तबियत धीरे-धीरे सुधर रही है। लेकिन 24 नवंबर की दोपहर अचानक उनके घर से एंबुलेंस निकलती दिखी। इसके बाद कई फिल्मी सितारे जुहू स्थित पवन हंस श्मशान पहुंचे । जबकि परिवार की ओर से आधिकारिक बयान अभी तक नहीं आया, फिल्ममेकर करण जौहर ने उनकी मौत की पुष्टि कर दी।

अभी तक उनकी मौत का कारण सामने नहीं आया है, लेकिन 1 नवंबर से उनकी तबियत लगातार खराब चल रही थी। धर्मेन्द्र की आखिरी फिल्म श्रीराम राघवन की Ikkis होगी, जिसमें अगस्त्य नंदा और जयदीप अहलावत भी नज़र आएंगे।

कारण जौहर का इमोशनल पोस्ट

धर्मेंद्र जी के निधन की खबर सामने आने के बाद कारण जौहर ने इंस्टाग्राम पर बेहद भावुक पोस्ट लिखा:

"एक युग का अंत... एक विशाल सुपरस्टार.. हिंदी सिनेमा के असली हीरो... बेहद हैंडसम और करिश्माई शख्सियत... वो हमेशा भारतीय सिनेमा के इतिहास में। उनका प्यार, उनका आशीर्वाद, उनकी गर्मजोशी... सबको बहुत याद आएगी। आज इंडस्ट्री में एक ऐसी जगह खोली गई है, जिसे कोई कभी भर नहीं पाएगा। हम आपको हमेशा याद रखेंगे धरमजी... अभी ना जाओ छोड़कर, कि दिल अभी भरा नहीं... ॐ शांति।"

करण का यह पोस्ट साफ दिखता है की फिल्म इंडस्ट्री धर्मेंद्र को सिर्फ एक कलाकार नहीं, बल्कि एक इंसान के रूप में भी बेहद प्यार करते थी।

गरम धरम की विरासत

धर्मेंद्र जी की आखिरी कुछ फ़िल्मों — ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ (2023) और ‘तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया’ (2024) ने एक बार फिर साबित किया की उम्र सिर्फ एक नंबर है।

उनकी बहुमुखी प्रतिभा ही उनकी पहचान थी

• रोमांटिक हीरो – फूल और पत्थर आए दिन बहार के
• एक्शन आईकॉन – धर्मवीर हुकूमत
• क्लासिक कॉमिक टाइमिंग – चुपके चुपके

लेकिन उनका सबसे यादगार किरदार था
👉 वीर, 1975 की कालजई फिल्म शोले में।

उनकी मुस्कुराहट, डायलॉग डिलीवरी, डांस स्टेप्स और ‘यमला पगला दीवाना’ जैसे गाने आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। धर्मेंद्र सिर्फ महिलाओं के ही नहीं, बल्कि पुरुषों के भी चहेते सितारे थे।

धर्मेंद्र – ही- 'मैन ऑफ बॉलीवुड' कैसे बने?

धर्मेंद्र जी  का जन्म 8 दिसंबर 1935, नसरेली (पंजाब) में हुआ था।
1960 में फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे से उन्होंने अपना अभिनय सफर शुरू किया। कुछ ही सालों में वह रोमांस और ड्रामा फिल्मों के पसंदीदा हीरो बन गए।

1960 और 70 का दशक धर्मेंद्र के नाम रहा।
उनके लुक्स, एक्टिंग, स्टाइल, कॉमेडी और एक्शन—
सब में महारत थी। फिल्म चुपके चुपके में उनकी ही कॉमिक टाइमिंग आज भी लोगों के चेहरे पर मुस्कान लेती आती है।

सम्मान
2012 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया।

धर्मेंद्र का परिवार

धर्मेंद्र नहीं रहे: 89 साल की उम्र में मुंबई स्थित घर पर हुआ निधन, बॉलीवुड में शोक की लहर

धर्मेंद्र का पारिवारिक जीवन भी उतना ही चर्चा में रहा जितना उनका फिल्मी करियर।

वे दो बार शादीशुदा थे:

1. प्रकाश कौर जिनसे उनके चार बच्चे:
• सनी देओल
•बॉबी देओल
• विजेता देओल
• अजीत देओल

2. हेमा मालिनी – उनके पोस्टर और बाद में जीवन संगिनी

• ईशा देओल
• अहाना देओल

परिवार, विशेष कर बेटे सनी और बॉबी अक्सर पिता के प्रति अपनी भावनाओं को सार्वजनिक रूप से व्यक्त करते रहे हैं।

धर्मेंद्र घर जाना सिर्फ एक अभिनेता का जाना नहीं है—यह हिंदी सिनेमा के एक पूरे दौर का अंत है।
उनकी मुस्कान, उनका सादापन, उनका अंदाज और उनका दिल सबको हमेशा याद रहेगा।

**धर्म की सदैव दिलों में जिंदा रहेंगे ।
ओम शांति

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SUBODH KUMAR