Bihar Election 2025: नीतीश कुमार और एनडीए की जीत पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया का बड़ा विश्लेषण

Bihar Election: में नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की जीत ने सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में चर्चा बटोरी है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया के कई रिपोर्ट और विश्लेषण इस नतीजे को बाहर अहम रहे हैं। कई विदेशी विशेषज्ञों का मानना है कि इस जीत के पीछे महिलाओं को किए गए कैश ट्रांसफर, जमीनी योजनाओं का असर और एनडीए की राजनीतिक रणनीति की बड़ी भूमिका रही। कुछ विश्लेषकों ने इसे बिहार की सामाजिक और राजनीतिक दिशा में बड़ा बदलाव बताया है, जो आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित कर रहा है।
महिलाओं तक पहुंची योजनाओं का असर
कई विदेशी मीडिया संस्थानों ने इस बात पर जोर दिया है कि NDA की जीत में महिलाओं की भागीदारी निर्णायक रही। बिहार में लंबे समय से लडकियों की शीशा, साइकिल योजना गैस कनेक्शन, स्कॉलरशिप और हाल में किए गए ट्रांसफर जैसे कदमों ने महिला वोटरों को सरकार के करीब बनाए रखा।
इन रिपोर्टों के अनुसार, बिहार की महिलाओं ने नीतीश को अस्थिरता और सुरक्षा का प्रतीक मानते हुए एक बार फिर उस पर भरोसा जताया।
NDA की राजनीतिक रणनीति की प्रशंसा
अंतर्राष्ट्रीय विश्लेषकों ने एनडीए की राजनीति को काफी प्रभावी बताया । जदयू और भाजपा का संयुक्त नेतृत्व, विपक्ष की कमजोर तैयारी के मुकाबले ज्यादा संगठित दिखाई दिया। रिपोर्ट में कहा गया कि चुनाव प्रचार पूरी तरह एनडीए के एजेंडे पर केंद्रित रहा – सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और कानूनी व्यवस्था जैसी पारंपरिक उपलब्धियां बार-बार सामने रखी गई। इन सब ने मतदाताओं के मन में इस गठबंधन के प्रति भरोसे को मजबूत किया !
Bihar की राजनीति में बड़ा मोड़ ?
कई विदेशी विशेषज्ञों ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि यह चुनाव सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि बिहार के सामाजिक-राजनीतिक माहौल में एक बड़े बदलाव का संकेत है। उन्होंने कहा कि यह नतीजा भविष्य में देश की राजनीति को नए समीकरण दे सकता है, खासकर तब – जब जातीय राजनीति, कल्याणकारी योजनाएं और नेतृत्व की छवि तीनों एक साथ प्रभाव डाल रहे हों।
“फाइनेंशियल टाइम्स” का विश्लेषण: नीतीश कुमार की बाइडन से तुलना
“Bihar Election के दौरान नीतीश कुमार की खराब सेहत को लेकर लगातार खबरें चर्चा में बनी रहीं।”
ब्रिटेन के प्रतिष्ठित अखबार “फाइनेंशियल टाइम्स” में प्रसिद्ध ग्लोबल इन्वेस्टर और लेखक रुचिर शर्मा ने एक बेहद दिलचस्प विश्लेषण लिखा है, जिसमें उन्होंने नीतीश कुमार की तुलना अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन से की है।
उन्होंने लिखा कि Bihar Election प्रचार के दौरान नीतीश कुमार की खराब सेहत की चर्चा खूब रही। वह मंच पर आते तो थे, लेकिन उनके आसपास मौजूद सहयोगी इस बात को लेकर चिंतित दिखते थे की कहीं भाषण देते समय गलती ना कर दे। उनके कमजोर सेहत, सूनी निगाहें और कभी-कभी भूलने जैसी स्थितियों की बातें मीडिया में लगातार आती रहीं।
फिर भी शर्मा के अनुसार नीतीश कुमार ने बाइडन से भी ज्यादा गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद अपनी नेतृत्वकारी क्षमता के सहारे अपने गठबंधन को जीत दिला दी। यह चुनाव उनके लिए बड़ी चुनौती था, लेकिन नतीजे बताते हैं की जनता का भरोसा अभी उनके साथ है।
इवेंट की मेजबानी युटुब आशीष चंचलानी ने की, जिन्होंने अपने मजाकिया अंदाज से भीड़ को लगातार मनोरंजन किया। उन्होंने भी साइंस की तरह (जय बाबू) का नारा लगाया ओर RRR के लिए राजामौली की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय सिनेमा को नई ऊंचाई दी है।
जब श्रुति हसन मंच पर आई और लाइव परफॉर्म किया तो माहौल और शानदार हो उठा। उन्होंने फिल्म के एल्बम का अपना सिंगल “लेट ईट बैंग, ग्लोबट्रॉटर” गया, जिस एमएम कीरवाणी ने कंपोज किया है। यह गाना पहले ही काफी चर्चा बटोर रहा है।
नीतीश कुमार की लोकप्रियता अभी भी कायम
अपने लेख में रुचिर शर्मा भी बताते हैं कि वह पिछले 30 सालों से भारत के राष्ट्रीय और राज्यों के चुनाव कवर करते आए हैं, और यह उनका बिहार का छठ दौरा था। उनकी नजर में बिहार की हरी-भरी मगर दलदली जमीन पर गरीबी की गहरी छाप अभी दिखती है।
उनके अनुसार नीतीश कुमार के सेहत और बिहार के धीमे विकास को लेकर उन्हें लगा था कि इस बार एक बड़े मुद्दे बनेंगे।
लेकिन बिहार के लोगों से बातचीत के बाद उन्होंने महसूस किया कि नीतीश के पारंपरिक समर्थक आज भी उनके कामों के लिए आभारी हैं – विशेषकर शिक्षा, बिजली, सड़क और महिलाओं की सुरक्षा के क्षेत्र में हुए बदलावों के लिए। यही वजह है कि स्वास्थ्य संबंधी विवादों और विपक्ष की आलोचनाओं के बावजूद नीतीश कुमार पर लोगों ने भरोसा कायम रखा।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया की नजर में Bihar Election क्यों खास?
विदेशी मीडिया ने कुछ प्रमुख कारण बताए हैं, जिनकी वजह से इस चुनाव पर उनकी नजर टिकी रही: –
1. नेतृत्व की परीक्षा
नीतीश कुमार जैसे वरिष्ठ नेता की सेहत पर सवालों के बीच जीत एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश देता है।
2. सामाजिक आधार में बदलाव
जातीय राजनीतिक से आगे बढ़कर महिला वोट, युवा वोट और कल्याणकारी नीतियों की राजनीति पर ध्यान गया।
3. भारतीय राजनीति का संकेत
यह चुनाव दिखता है कि भारत में कल्याणकारी योजनाओं, विकास, स्थानीय नेतृत्व और गठबंधन राजनीति का संतुलन भविष्य के चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
नतीजे: उम्मीद और चुनौतियों के बीच एक जीत
नीतीश कुमार और एनडीए की जीत को अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने एक आश्चर्यजनक, राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और विश्लेषण योग्य घटना बताया है। एक तरफ उनके स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार चर्चा होती रही, दूसरी तरफ उनके लंबे शासन में किए गए बुनियादी सुधारो ने एक बड़ा जनाधार तैयार कर दिया – जिसने फिर से उन्हें सत्ता तक पहुंचाया।






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