संचार साथी ऐप क्या है? सरकार की नई अनिवार्यता और विवाद की पूरी कहानी
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संचार साथी ऐप क्या है: सरकार की नई अनिवार्यता और विवाद की पूरी कहानी

संचार साथी ऐप क्या है? सरकार की नई अनिवार्यता और विवाद की पूरी कहानी

संचार साथी ऐप क्या है? सरकार की नई अनिवार्यता और विवाद की पूरी कहानी
दूरसंचार विभाग का दावा है कि इन नए दिशा निर्देशों से साइबर क्राइम पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।

भारत में मोबाइल उपयोगकर्ताओं की संख्या करोड़ों में है और हर दिन लाखों में स्मार्टफोन खरीदे जाते हैं। 

ऐसे समय में सरकार की ओर से एक बड़ा फैसला सामने आया है—संचार साथी ऐप को हर नए फोन में अनिवार्य रूप से इंस्टॉल करने का आदेश। सुरसंचार विभाग ( DOT) के इस सुरक्षा और डिजिटल फ्रोड रोकने का अहम कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे निजता का उल्लंघन और निगरानी का खतरा कह रहा है।

आइए समझते हैं कि यह ऐप आखिर है क्या, सरकार क्यों इसे अनिवार्य कर रही है, और इस पर इतना विवाद क्यों हो रहा है।

संचार साथी ऐप क्या है?

संचार साथी ऐप भारत सरकार का एक साइबर सुरक्षा और टेलीकॉम सेफ्टी टूल है। इसे शुरू में 2023 में एक पोर्टल के रूप में लॉन्च किया गया था, और बाद में जनवरी 2025 में इसे मोबाइल ऐप का रूप दिया गया। यह ऐप एंड्राइड और iOS दोनों पर उपलब्ध है।

सरकारी जानकारी के अनुसार:

• अगस्त 2025 तक ऐप 50 लाख से ज्यादा बार डाउनलोड हो चुका है।

37 लाख से अधिक चोरी या खोए फोन इस ऐप के जरिए ब्लॉक किए गए।

22.76 लाख से ज्यादा डिवाइस इस ऐप के जरिए खोजे गए।

संचार साथी ऐप मूल रूप से CEIR नाम की सरकारी प्रणाली से जुड़ा होता है। CEIR (Central Equipment Identity Register) एक विशाल डेटाबेस है, जिसमें देश के हर मोबाइल का IMEI नंबर दर्ज रहता है।

सरकार क्यों चाहती है कि यह ऐप हर फोन में पहले से मौजूद हो?

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संचार साथी ऐप: DOT ने अपने आदेश में कहा कि मार्च 2026 से जो भी फोन भारत में बिक्री के लिए आएंगे, उनमें यह ऐप इंस्टॉल होना जरूरी है, और:

• इसे डीएक्टिवेट नहीं किया जा सकेगा।
• इसे अनइनस्टॉल नहीं किया जा सकेगा
• फोन बनाने वाली कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि अप पूरी तरह काम करें।

सरकार इसके पीछे तीन मुख्य कारण बता रही है:

1. नकली और क्लोन फोन रोकना

बाजार में ऐसे फोन भी घूम रहे हैं जिनमें नकली या एक ही IMEI नंबर इस्तेमाल किया जाता है। इससे अपराधी गतिविधियां बढ़ती हैं और फोन ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। सरकार मानती है कि संचार साथी ऐप IMEI की सटीक जानकारी देकर फेक डिवाइस की पहचान करेगा।

2. चोरी और गुम फोन को तुरंत ब्लॉक/खोजने में मदद

ज्यादा से ज्यादा लोग अपना फोन खो देते हैं या चोरी हो जाता है। यह अप सरकार की CEIR प्रणाली के जरिए फोन को जल्दी खोजने या ब्लॉक करने में मदद करता है।

3. स्पैम और स्कैन कॉल रिपोर्ट करने में आसान

यह ऐप TRAI के DND ऐप जैसा ही एक फीचर भी देता है, जिससे लगातार आने वाले स्पैम कॉल और धोखाधड़ी वाले नंबरों की शिकायत तुरंत दर्ज जा सकती है।संचार साथी ऐप

इस ऐप में क्या-क्या फीचर है?

1. चोरी हुए फोन की शिकायत दर्ज

अगर फोन खो जाए तो अप में शिकायत दर्ज करने पर CEIR सिस्टम फोन को ब्लॉक कर देता है।

2. IMEI नंबर की जांच

यह चेक कर सकते हैं कि आपका फोन असली IMEI पर काम कर रहा है या किसी तरह की छेड़छाड़ हुई है।

3. स्पैम और फ्रॉड कॉल रिपोर्ट

डराने-धमकाने वाले कॉल, फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर बात करने वाले कॉल, डिजिटल गिरफ्तारी जैसी घटनाओं के खिलाफ रिपोर्ट की सुविधा।

4. आपके नंबर पर रजिस्टर्ड सभी सिम की जानकारी

 किसी ने आपके नाम पर नकली सिम तो नहीं ले रखा?इस ऐप से आसानी से पता चलता है।

5. बहुभाषाई सुविधा

 ऐप हिंदी और 21 अन्य भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है–इससे पूरे देश में हर वर्ग का उपयोगकर्ता सहजता से इसे इस्तेमाल कर सकता है।

फोन में ऐप कैसे काम करता है?

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• जब पहली बार ऐप खोलते हैं तो यह मोबाइल नंबर मांगता है।

• नंबर डालते हैं आपके फोन पर OTP आता है।

• OTP दर्ज करते हैं अप आपके फोन के IMEI नंबर को पहचान लेता है।

• इसके बाद CEIR सर्वर से उस IMEI स्थिति चेक की जाती है— ब्लैकलिस्टेड है या चोरी का केस दर्ज है या नहीं।

सरकार का दावा है कि यह प्रक्रिया यूजर की सुरक्षा को और मजबूत बनाती है तथा डिजिटल फ्रॉड को होती है।

विपक्ष का आरोप: यह नागरिकों की निगरानी का टूल?

सरकार के इस फैसले के साथ ही विपक्षी दलों और कुछ नागरिकों ने इसका खुलकर विरोध किया है। सबसे बड़े मुद्दे— निजता का अधिकार और सरकारी निगरानी का खतरा।

(कांग्रेस का रुख)

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इसे असंवैधानिक बताया। उनका कहना है:

• निजता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है।

• फोन में ऐसा ऐप जो हटाया न जा सके, लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने का तरीका बन सकता है

उन्होंने X (Twitter) पर लिखा:

“हर फोन में एक सरकारी ऐप अनिवार्य करना निगरानी का बड़ा टूल बन सकता है।”

तहसील पुनावाला की चिंता

राजनीतिक विश्लेषक तहसील पूनावाला लिखते हैं:
• सरकार “सुरक्षा” के नाम पर लोगों की कॉल, मैसेज और लोकेशन तक पहुंच सकती है।
• यह नागरिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।

प्रियंका चतुर्वेदी का बयान
राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इसे “बिग बॉस जैसे निगरानी” बताया। उन्होंने कहा कि यह लोगों की निजता पर बिना अनुमति दखल है।

उनका कहना है कि:

• सरकार शिकायत निवारण प्रणाली मजबूत करें
(जैसे स्पैम कॉल की समस्या रियल-टाइम में हल करना)

• निगरानी बढ़ाने वाले कम ना उठाएं

सिम बाइंडिंग का मामला भी जुड़ा
DOT पहले ही मैसेजिंग एप्स के लिए सिम बाइंडिंग का आदेश दे चुका है। 

इसके तहत:

• WhatsApp, Telegram जैसी एप्स सिर्फ उसे डिवाइस पर चलेंगे जिसमें रजिस्टर्ड सिम लगा हो।

• अगर सिम हटा दिया जाता है या विदेश ले जाया जाता है, तो ऐप काम नहीं करेगा।

सरकार का तर्क है कि इससे

• “डिजिटल गिरफ्तारी” फ्रॉड,
• फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर कॉल,
• अंतर्राष्ट्रीय स्कैन कॉल जैसी घटनाएं कम होगी।

मोबाइल कंपनियों की प्रतिक्रिया-क्या Apple करेगा विरोध?

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यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने किसी ऐप को अनिवार्य करने के लिए कहा है।

• TRAI ने पहले DND स्पैम रिपोर्टिंग ऐप अनिवार्य करने की कोशिश की थी।

• Apple ने इसका विरोध किया था और कहा था कि ऐप की कराई गई परमिशन
(SMS और कॉल लॉग तक पहुंच) यूजर की निजता का उल्लंघन है।

ऐसे में माना जा रहा है कि Apple और कुछ अन्य कंपनियां संचार साथी ऐप को भी लेकर सवाल उठा सकती हैं, खासकर यह देखते हुए की ऐप:
• अनइनस्टॉल नहीं होगा
• डीएक्टिवेट नहीं किया जा सकेगा
• सिस्टम लेवल पर काम करेगा

सरकार का पक्ष “यह सुरक्षा के लिए जरूरी।”

सरकार बार-बार यह जोर देखकर कह रही है कि:

•इससे चोरी का फोन जल्दी मिल सकता है
•फेक IMEI वाले फोन की पहचान होगी
•डिजिटल ठगी में कमी आएगी
•यूजर की पहचान और डिवाइस दोनों सुरक्षित रहेंगे

सरकार का दावा है कि संचार साथी ऐप:

“मोबाइल सुरक्षा, पहचान सुरक्षा और डिजिटल फ्रॉड रोकथाम का एक शक्तिशाली टूल है।”

सवाल जो अभी बाकी है

इस ऐप से जुड़े कुछ मुद्दे अभी भी स्पष्ट नहीं है, जैसे–

 1. क्या ऐप IMEI नंबर ऑटोमेटिक पड़ेगा?
DOT ने स्पष्ट नहीं किया कि:

क्या अप खुद-ब-खुद IMEI पढ़ सकेगा?
या
यूजर को IMEI नंबर डालना होगा?

2. ऐप फोन में कौन-कौन से डेटा सा पहुंच पाएगा?
हालांकि सरकार कहती है की ऐप सुरक्षा के लिए है, लेकिन यह बताया नहीं गया कि ऐप:

• कॉल लॉग
• मैसेज
• लोकेशन को एक्सेस करती है या नहीं?

यही वह बिंदु है जिसे विपक्ष “निगरानी का खतरा” कह रहा है।

3. अनइनस्टॉल ना कर पाने का क्या असर?

उपभोक्ता संगठन भी पूछ रहे हैं कि:

• एक ऐसा ऐप जिसे यूजर हटाना नहीं चाहता, उसे अनिवार्य क्यों बनाया जा रहा है।

निष्कर्ष: जनता की सुरक्षा या निगरानी काखतरा?

संचार साथी ऐप एक ओर डिजिटल अपराधों से लड़ने में बड़ा हथियार साबित हो सकता है। चोरी के फोन ढूंढना, फेक डिवाइस की पहचान, स्पैम रोकना – ये सब आम लोगों के लिए उपयोगी फायदे हैं

लेकिन दूसरी ओर:

• ऐप का अनिवार्य इंस्टाल होना
• उसे हटाने की अनुमति न होना
• संभावित डाटा एक्सेस पर अस्पष्टता
• निजता के अधिकार से जुड़े सवाल

इन सब के कारण यह मुद्दा पूरी तरह तकनीकी न होकर राजनीतिक बन चुका है।

आने वाले मशीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि:

• मोबाइल कंपनियां क्या कदम उठाती हैं।
• क्या सरकार इस पर कोई स्पष्ट डेटा पॉलिसी लाएगी
• विपक्ष के दबाव के चलते दिशा निर्देशों में बदलाव होगा या नहीं?

फिलहाल इतना तय है कि संचार साथी ऐप भारत के डिजिटल इकोसिस्टम में बड़ा बदलाव लाने वाला है और इसका असर देश के हर स्मार्टफोन यूजर पर पड़ेगा।