दिल्ली बम विस्फोट: डीएनए से पुष्टि,दिल्ली बम विस्फोट: डीएनए से पुष्टि
दिल्ली बम विस्फोट: डीएनए से पुष्टि, डॉ. उमर उस गाड़ी को चला रहा था, उसका पैर स्टेरिंग और एक्सीलेटर के बीच में था।
दिल्ली बम विस्फोट: डीएनए से पुष्टि, डॉ. उमर उस गाड़ी को चला रहा था, उसका पैर स्टेरिंग और एक्सीलेटर के बीच में था।
सोमवार शाम को लाल किले के निकट हुए बम विस्फोट में मरे व्यक्ति की पहचान डॉक्टर के रूप में की गई है। उसकी उम्र नबी के रूप में मानी जाती है। दिल्ली पुलिस ने खुलासा किया कि फॉरेंसिक जांच में कार के भीतर जले हुए पैर का डीएनए नमूना नबी की माता के सैंपल से मेल खाता है।

दिल्ली बम विस्फोट: नबी जम्मू-कश्मीर के पुलवामा से हैं और फरीदाबाद में अल-फलाह यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने विस्फोट से 11 दिन पहले एक सफेद हुंडई i20 गाड़ी खरीदी थी।
जांच में यह खुलासा हुआ है कि नबी का उन दो चिकित्सकों से संबंध था जिन्हें हाल ही में जम्मू-कश्मीर में गिरफ्तार किया गया। इन चिकित्सकों के पास से 2,900 किलो अमोनियम नाइट्रेट और शस्त्रों की बरामदगी हुई थी। पुलिस का दावा है कि यह विस्फोट एक योजनाबद्ध आतंकवादी हमले का हिस्सा था।

1.डीएनए क्या है
DNA यानी (Deoxyribonucleic Acid) हमारे शरीर का “जेनेटिक मैटेरियल” है, यही वह मॉलेक्युलस है जो हमारे जींस बनता है. हर इंसान के लगभग हर सेल (कोशिका) में एक ही जैसा DNA होता है,
ज़्यादा तर DNA कोशिका के (न्यूक्लियस) में होता है इसे न्यूक्लियर डीएनए कहते हैं! लेकिन थोड़ा सा DNA माइटोकॉन्ड्रिया में भी मिलता है, जिसे माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए या MTDNA कहा जाता है।
2.माइटोकॉन्ड्रिया क्या करते हैं?
माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका के “पावरहाउस” होते हैं – ये हमारे खाने से मिलने वाली ऊर्जा को ऐसे रूप में बदलते हैं, जिसे कोशिका उपयोग कर सकें। माइटोकॉन्ड्रिया खाद्य अणुओं को तोड़कर और ऑक्सीजन का उपयोग करके एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट (ATP) के रूप में ऊर्जा उत्पन्न करते हैं, जो कोशिका के लिए आणविक ईंधन है।
3.डीएनए का कोड कैसा लिखा होता है?
DNA एक कोड की तरह होता है जो 4 रासायनिक आधार से बना है।
एडेनिन (ए)
गुआनिन (जी)
साइटोसिन (सी)
थाइमिन (टी)
इंसान के डीएनए में लगभग 3 बिलियन बेस पेयर होते है, और सभी लोगों के डीएनए में इनका 99% हिस्सा बिल्कुल सामान होते हैं। इन बेस का ऑर्डर (अनुक्रम ) ही ये तय करता है कि हमारा शरीर कैसे बनता है और काम करता है। बिल्कुल वैसे ही जैसे अक्षर मिलकर शब्द और वाक्य बनता है !
3.बेस पेयर और डीएनए का संरचना
डीएनए का बेस हमेशा जोड़े में जुड़ते हैं।
A के साथ T
C के साथ G
हर बेस एक शुगर अणु और एक फॉस्फेट अणु से भी जुड़ता है, ये तीनों मिलकर न्यूक्लियोटाइड बनाते हैं।
DNA 🧬 में ये न्यूक्लियोटाइड दो लम्बे किस्म में अरेंज होते हैं, जो मिलकर (double helix) स्पाइरल शेप बनाते हैं।
जैसे एक सीधी सीढ़ी (ladder) जिसमें बेस पेयर रंग बनाते हैं, और शुगर फास्फेट चैन उसके साइड रेल्स ।
DNA की कॉपी कैसे बनती है?
डीएनए की एक खास बात है कि वो अपनी नकल (कॉपी) बना सकता है। जब भी कोशिका विभाजन होता है, DNA 🧬 के डोनो स्ट्रैंड्स एक-एक पैटर्न के रूप में काम करते हैं, ताकि नए कोशिका में पुराने कोशिका जैसा ही DNA 🧬 बन सके।
ये प्रक्रिया जरूरी है क्योंकि हर नई कोशिका को पूरी आनुवंशिक जानकारी चाहिए होती है – बिल्कुल वैसे ही जैसे एक किताब की हर कॉपी मूल (ओरिजिनल) जैसी ही होती है।
