ऑनलाइन कंटेंट पर नजर रखने को सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा और क्यों हो रही है इसकी चर्चा?2025
ऑनलाइन कंटेंट पर नजर रखने को सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा और क्यों हो रही है इसकी चर्चा?

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ऑनलाइन कंटेंट के बढ़ते प्रभाव और उसके गलत इस्तेमाल पर बड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट का मानना है कि इंटरनेट पर मौजूद कंटेंट को नियंत्रित करने के लिए एक स्वतंत्र और निष्पक्ष ऑटोनॉमस बॉडी की जरूरत है- ऐसी संस्था जिस पर किसी तरह का राजनीतिक या निजी दबाव न हो।
क्यों उठी नई रेगुलेटरी बॉडी की जरूरत?
CJI जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि अभी जो सेल्फ रेगुलेशन यानी प्लेटफार्म का खुद का निगरानी मॉडल है, वह ठीक से काम नहीं कर रहा है।
गैर कानूनी या विवादित कंटेंट को हटाते हटाते काफी समय निकल जाता है, और तब तक वह लाखों लोगों तक फैल चुका होता है।
यह कोई टिप्पणी उस केस की सुनवाई में कर रहा था जिसे यूट्यूब पर और पॉडकास्ट रणवीर अलाहाबादिया समेत कई लोगों ने अपने खिलाफ की गई FIR को चुनौती दी थी। मामला फरवरी में उनके युटुब शो पर किए गए एक विवादित कमेंट से जुड़ा था।
ऑनलाइन कंटेंट पर मौजूदा नियम क्या कहते हैं?
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर यूजर द्वारा अपलोड किए जाने वाले कंटेंट को आईटी रूल्स 2021 के तहत देखा जाता है।
इनमें कुछ प्रमुख प्रावधान है:
* कोई सरकारी एजेंसी गैर कानूनी कंटेंट हटाने का आदेश दे तो प्लेटफार्म को 36 घंटे में कार्रवाई करनी होती है।
* कोई आम यूजर शिकायत करें तो प्लेटफार्म को 24 घंटे में जवाब देना होता है और 15 दिनों के अंदर एक्शन लेना होता है।
लेकिन कोर्ट का कहना है कि यह प्रक्रिया धीमी है, और जब तक कार्रवाई होती है नुकसान हो चुका होता है।
जस्टिस बागची ने सवाल किया:

जस्टिस बागची ने कहा कि:
अगर कोई कंटेंट देश विरोधी है या समाज को नुकसान पहुंचाने वाला है तो क्या सिर्फ सेल्फ रेगुलेशन काफी है?
तो सुप्रीम कोर्ट क्या चाहता है?
ऑनलाइन कंटेंट: कोर्ट ने सुझाव दिया है कि एक स्वतंत्र संस्थान बनाया जाए:
* जो किसी भी राजनीति के निजी दबाव से मुक्त हो।
* ऑनलाइन कंटेंट पर नियमित निगरानी रखें।
गलत या हानिकारक कंटेंट पर तुरंत कार्रवाई कर सके।
साथ ही, कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह चार हफ्तों के भीतर गाइडलाइंस का ड्राफ्ट तैयार करें और जनता की राय भी ले।
सरकार ने “एथिक्स कोड” पर भी कर रही है काम
सूचना और प्रसारण मंत्रालय एक नए डिजिटल एथिक्स कोड पर विचार कर रहा है, जो मौजूदा आईटी रूल्स 2021 को अपडेट करेगा।
सूत्रों BBC के मिली जानकारी के अनुसार इस नए कोड में:-
* अलग-अलग उम्र के हिसाब से कंटेंट रेटिंग ( U/A, A आदि)
* अश्लीलता और आपत्तिजनक कंटेंट की साफ परिभाषा
* AI से बने कंटेंट को लेकर नए नियम
* OTT सोशल मीडिया डिजिटल न्यूज़ — सभी पर लागू होने वाले नियम शामिल हो सकते हैं।
कई विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन नियमों में अश्लील या देशविरोधी जैसे शब्दों का दायरा बहुत बड़ा रखा गया तो इसका दुरुपयोग होने का खतरा है।
एक्सपट्र्स और कंटेंट क्रिएटर की क्या राय है?
✦ कुछ लोग चिंतित हैं
कई डिजिटल राइट्स एक्टिविस्ट्स और क्रिएटर को डर है कि_ नई रेगुलेटरी बॉडी सेंसरशिप की तरह काम न करने लगे।
सरकार विरोधी कंटेंट पर कार्रवाई बढ़ सकती है
देश विरोधी या अश्लील जैसे शब्दों की गलत व्याख्या हो सकती है।
प्रसिद्ध कंटेंट क्रिएटर डॉक्टर मेडूसा ने कहा:
किसी भी रेगुलेटरी बॉडी पर असर न हो, यह मुमकिन नहीं लगता। इसका दुरुपयोग भी हो सकता है।
✦ कुछ विशेषज्ञ इसे जरूरी बताते हैं
साइबर लॉ एक्सपर्ट पवन दुग्गल के मुताबिक यह एक अच्छा कदम है। खासकर बच्चों से जुड़े मामलों में गलत कंटेंट जितनी देर तक ऑनलाइन रहता है, उतना नुकसान होता है।
लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि —
इंटरनेट को 1990 के दशक के टीवी कानूनों से कंट्रोल करना ठीक नहीं होगा। इंटरनेट के लिए नए जमाने के मुताबिक नियम चाहिए।
निचोड़ ( Conclusion)
सुप्रीम कोर्ट का सुझाव एक महत्वपूर्ण बहस लेकर आया है–
सवाल यह है कि:
क्या हमें ऑनलाइन कंटेंट के लिए सख्त और तेज नियम चाहिए?
या क्या इसमें अभिव्यक्ति की आजादी पर खतरा बढ़ेगा?
अभी सरकार को अगले कुछ हफ्तों में ड्राफ्ट तैयार करना है। उसके बाद ही पता चलेगा कि भारत में ऑनलाइन कंटेंट का भविष्य किस दिशा में जाएगा।





